Trump’s speech causes global market panic: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा संबोधन ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सुनामी ला दी है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और व्यापारिक नीतियों पर ट्रंप के कड़े रुख के बाद निवेशकों में ऐसा डर बैठा कि महज 25 मिनट के भीतर दुनिया भर के शेयर बाजारों से 550 अरब डॉलर (लगभग 46 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति साफ हो गई।
भाषण के दौरान ही टूटने लगे बाजार
बुधवार रात (अमेरिकी समयानुसार) जब राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करना शुरू किया, तो बाजार को उम्मीद थी कि वे युद्ध विराम या तनाव कम करने का कोई संकेत देंगे। इसके उलट, ट्रंप ने ईरान को “अत्यधिक कठोर” प्रहार की चेतावनी दी और अगले 2-3 हफ्तों तक सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही। भाषण शुरू होने के 10 मिनट के भीतर ही अमेरिकी वायदा बाजार (US Futures) लाल निशान में चले गए और देखते ही देखते बिकवाली का ऐसा दौर चला कि वैश्विक मार्केट कैप में 550 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय बाजार पर गहरा असर: सेंसेक्स 1500 अंक टूटा
गुरुवार सुबह जब भारतीय शेयर बाजार खुले, तो ट्रंप के भाषण का असर साफ दिखा।
- सेंसेक्स (Sensex): शुरुआती कारोबार में ही 1,518 अंक (2.08%) गिरकर 71,616 पर आ गया।
- निफ्टी (Nifty): निफ्टी में भी 462 अंकों की भारी गिरावट देखी गई और यह 22,216 के स्तर पर पहुंच गया।
- निवेशकों को झटका: भारतीय निवेशकों को बाजार खुलते ही करीब 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
बाजार गिरने के 3 मुख्य कारण
- युद्ध विराम की उम्मीदें टूटीं: निवेशकों को उम्मीद थी कि ट्रंप ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को खोलने या युद्ध खत्म करने की समय सीमा देंगे, लेकिन उन्होंने सैन्य कार्रवाई और बढ़ाने के संकेत दिए।
- कच्चे तेल में उबाल: ट्रंप के भाषण के दौरान ही ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं, जिससे महंगाई बढ़ने का डर सताने लगा है।
- अनिश्चितता का माहौल: मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के बयानों में निरंतरता की कमी है, जिससे ग्लोबल फंड मैनेजर सुरक्षित निवेश (जैसे गोल्ड और डॉलर) की ओर भाग रहे हैं और शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय: “स्टैगफ्लेशन का खतरा”
मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के भाषण ने ‘स्टैगफ्लेशन’ (Stagflation) का खतरा बढ़ा दिया है—ऐसी स्थिति जहां विकास दर धीमी हो जाती है और महंगाई आसमान छूने लगती है। सिडनी और सिंगापुर के बड़े पोर्टफोलियो मैनेजर्स का कहना है कि जब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई बहाल नहीं होती, बाजार में यह अस्थिरता बनी रहेगी।
“बाजार ट्रंप के भाषण को सकारात्मक नहीं मान रहा है। जब तक यह स्पष्ट नहीं होता कि यह संघर्ष कब खत्म होगा, तब तक निवेशक जोखिम लेने से बचेंगे।” — रसेल चेस्लर, हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट, वैनेक ऑस्ट्रेलिया

