ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल सौंपेगी। यह तेल बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा और आय पर ट्रंप प्रशासन का नियंत्रण रहेगा। उन्होंने कहा, “तेल कंपनियां वहां निवेश करेंगी, हम तेल उद्योग को संभालेंगे और खर्च की भरपाई करेंगे।”
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार (लगभग 303 बिलियन बैरल) हैं, लेकिन प्रतिबंधों और कुप्रबंधन से उत्पादन कम है। इस तेल से अमेरिका को अरबों डॉलर की आय हो सकती है, जो कर्ज में डूबे अमेरिकी खजाने के लिए राहत की बात होगी।
वेनेजुएला के गुआयाना क्षेत्र में सोना, हीरे, लौह अयस्क, बॉक्साइट और दुर्लभ मिट्टी के बड़े भंडार हैं। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने कहा कि ट्रंप खनन क्षेत्र को पुनर्जीवित करेंगे। यह कदम चीन की दुर्लभ मिट्टी पर वैश्विक प्रभुत्व के खिलाफ है, जो तकनीक और रक्षा उद्योग के लिए जरूरी हैं।

ग्रीनलैंड पर नजर
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की धमकी दी है, जो डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा बताया, लेकिन असली वजह दुर्लभ मिट्टी के 1.5 मिलियन टन भंडार हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि अगले दो महीनों में कार्रवाई हो सकती है। कोलंबिया पर भी खनिजों के लिए दबाव है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं:
• कई देशों और विशेषज्ञों ने इसे अवैध आक्रमण करार दिया, इराक युद्ध (2003) से तुलना की।
• अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने इसे “तेल लूट” बताया।
• यूरोपीय नेता ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकियों की निंदा कर रहे हैं।
• मादुरो को न्यूयॉर्क में ड्रग और हथियारों के आरोपों में पेश किया गया, जहां उन्होंने खुद को वैध राष्ट्रपति बताया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला को “सुरक्षित संक्रमण” तक चलाएगा और तेल कंपनियों से बैठकें कर रहा है। स्थिति तनावपूर्ण है और वैश्विक स्तर पर कानूनी-कूटनीतिक बहस छिड़ गई है।

