Trump calls for military strike on Iran: जेनेवा वार्ता में ‘महत्वपूर्ण प्रगति’ लेकिन कोई समझौता नहीं, मध्य पूर्व युद्ध की आशंका बरकरार

Trump calls for military strike on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गुरुवार को मध्य पूर्व के शीर्ष कमांडर ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की विस्तृत जानकारी दी। उसी दिन स्विट्जरलैंड के जेनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर हुई अप्रत्यक्ष वार्ता समाप्त हुई, जिसमें ओमान के मध्यस्थ ने “महत्वपूर्ण प्रगति” का दावा किया, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती चरम पर है और विश्लेषक युद्ध की आशंका जता रहे हैं, हालांकि ट्रंप का अंतिम फैसला अभी अनिश्चित है।

मीडिया की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख नौसेना एडमिरल ब्रैड कूपर ने राष्ट्रपति ट्रंप को ब्रिफिंग दी। उनके साथ संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन भी मौजूद थे। ब्रिफिंग में दो मुख्य विकल्पों पर चर्चा हुई—ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों और परमाणु स्थलों पर सीमित हमला (चेतावनी के तौर पर) तथा बड़े पैमाने पर कई लक्ष्यों पर सतत अभियान। कुछ रिपब्लिकन और ट्रंप प्रशासन के अधिकारी इजराइल को पहले हमला करने देने का सुझाव दे रहे हैं ताकि अमेरिका को राजनीतिक कवर मिल सके।

ट्रंप ईरान की यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से बेहद नाराज हैं। उन्होंने राज्य के सभा भाषण में साफ कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से मजबूत कर रहा है—जून 2025 में अमेरिकी हमलों और इजराइल-ईरान के 12 दिन के युद्ध के बाद।

जेनेवा वार्ता का नतीजा
जेनेवा में तीसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता (ओमान के विदेश मंत्री सैयद बिन हमाद अल बुसैदी की मध्यस्थता में) छह घंटे चली। ओमान के मंत्री और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने “महत्वपूर्ण प्रगति” बताई और अगले सप्ताह वियना में तकनीकी स्तर की वार्ता तय की गई। लेकिन अमेरिकी सूत्रों के अनुसार, ईरान अमेरिकी मुख्य मांगों—फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु केंद्रों को नष्ट करना, संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपना और स्थायी शून्य-संवर्धन—को मानने को तैयार नहीं है। ईरान पूर्ण प्रतिबंध हटाने और “शांतिपूर्ण” परमाणु अधिकारों पर अड़ा है।

क्षेत्र में तनाव और सैन्य तैयारी
अमेरिका ने क्षेत्र में भारी सैन्य ताकत जुटाई है—एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और गेराल्ड आर. फोर्ड, एफ-35 और एफ/ए-18 जेट्स समेत। विश्लेषक कहते हैं कि यह 2003 के इराक युद्ध के बाद सबसे बड़ा जमावड़ा है। इजराइल खुद को रक्षा और हमले दोनों के लिए पूरी तरह तैयार बताता है। पूर्व मॉसाद प्रमुख डैनी यातोम ने कहा, “ट्रंप के अलावा कोई नहीं जानता आखिर क्या होगा, लेकिन इजराइल के लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सुनहरा मौका है।” लेबनान में हिजबुल्लाह कमजोर हो चुका है, लेकिन ईरान के हमले में शामिल होने की धमकी दे रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि हमला हुआ तो अमेरिकी ठिकानों और इजराइल पर जवाबी हमला होगा।

ट्रंप का फैसला अभी अनिश्चित
व्हाइट हाउस डिप्टी प्रेस सचिव अन्ना केली ने कहा, “मीडिया ट्रंप के मन की अटकलें लगा सकती है, लेकिन फैसला सिर्फ राष्ट्रपति ही जानते हैं।” उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने जोर देकर कहा कि अमेरिका किसी लंबे युद्ध में नहीं फंसेगा। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कांग्रेस को बताया कि ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों को अंतरमहाद्वीपीय बनाने की कोशिश कर रहा है।
मध्य पूर्व के कई देश युद्ध की तैयारी में हैं। ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शनों में 7,000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मजबूत कार्रवाई चाहते हैं, लेकिन कमजोर समझौते से डरते हैं।

क्या होगा आगे?
वियना की तकनीकी वार्ता के नतीजे पर सबकी नजर है। अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो ट्रंप के पास सैन्य विकल्प खुले हैं, लेकिन लंबे अभियान के जोखिम—अमेरिकी सैनिकों पर हमला, क्षेत्रीय अस्थिरता—बहुत ज्यादा बताए जा रहे हैं। फिलहाल ट्रंप कूटनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन धैर्य सीमा पर है। यह स्थिति पूरे मध्य पूर्व को अस्थिरता की ओर धकेल रही है। आगे की खबरों पर नजर रखिए—कोई भी नया विकास तुरंत क्षेत्रीय सुरक्षा को बदल सकता है।

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