महासभा के शहर महामंत्री नंदू कुमार, मंडल महामंत्री नितेश भारद्वाज, शहर अध्यक्ष विशाल कुमार, जिला अध्यक्ष मीरा और मंडल अध्यक्ष मनीष पंडित सहित अन्य पदाधिकारी इस कार्यक्रम में शामिल थे। संगठन का दावा है कि ताजमहल के निर्माण के बाद से पहली बार यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। उन्होंने ताजमहल को ‘तेजोमहालय’ बताते हुए पुराना दावा दोहराया कि यह मूल रूप से प्राचीन शिव मंदिर था। कुछ वीडियो में कार्यकर्ताओं को मुख्य गुंबद की ओर इशारा करते हुए भारत माता के जयकारे लगाते भी देखा गया।
हिंदू महासभा ने इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राष्ट्रवाद के आह्वान से जोड़ते हुए आयोजित बताया गया है। संगठन लंबे समय से ताजमहल में हिंदू धार्मिक गतिविधियों की अनुमति की मांग करता रहा है।
घटना के सामने आने के बाद ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था में हलचल मच गई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और सीआईएसएफ के जवानों ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कार्यकर्ता परिसर के अंदर कैसे पहुंचे और झंडा फहराया। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
गौरतलब है कि ताजमहल को लेकर पहले भी कई विवाद हो चुके हैं। हाल ही में जनवरी 2026 में शाहजहां के उर्स आयोजन के विरोध में हिंदू महासभा ने प्रदर्शन किया था। इससे पहले नमाज, हनुमान चालीसा पाठ और भगवा झंडा फहराने जैसे मामले भी सामने आ चुके हैं।
यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कई यूजर्स इसे राष्ट्रप्रेम से जोड़कर सराह रहे हैं, तो कुछ इसे स्मारक की गरिमा से खिलवाड़ बता रहे हैं। वायरल वीडियो में राष्ट्रगान और नारों की गूंज साफ सुनाई दे रही है।
ताजमहल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और रोजाना हजारों पर्यटक यहां आते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं सुरक्षा और प्रबंधन के लिए नई चुनौती पेश कर रही हैं।

