This Holi 2026, it’s all about ‘kidulting’: एडल्ट्स अपनी कमाई से खरीद रहे महंगी पिचकारियां, जयपुर का 400 साल पुराना राजसी गुलाल गोता भी छा गया

This Holi 2026, it’s all about ‘kidulting: होली का त्योहार इस बार सिर्फ बच्चों का नहीं रहा। मिलेनियल्स और जेन-जेड वाले अपनी ‘एडल्ट मनी’ से सुपर-कूल पिचकारियों पर खर्च कर रहे हैं, तो वहीं जयपुर की शाही परंपरा ‘गुलाल गोता’ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की बदौलत पूरे देश (और विदेश) में वायरल हो गई है। होलिका दहन कल भी बनाया गया और आज भी मनाया जा रहा है और रंगवाली होली कल (4 मार्च) है, ऐसे में दोनों ट्रेंड्स मिलकर त्योहार को नॉस्टैल्जिया, लग्जरी और विरासत का अनोखा मिश्रण बना रहे हैं।

पिचकारियों पर ‘बड़े बच्चों’ का जोर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई समेत देश के बड़े शहरों के बाजारों और क्विक कॉमर्स ऐप्स (जैसे इंस्टामार्ट) पर इलेक्ट्रिक हाई-प्रेशर पिचकारियों की खूब बिक्री हो रही है। नोएडा के आइकॉनिक टॉय गैलरी के दुकानदार बताते हैं, “बच्चों से ज्यादा बड़े लोग आ रहे हैं। बेसिक प्लास्टिक नहीं, बल्कि यूनिक डिजाइन-इलेक्ट्रिक चार्जेबल गन्स, बैकपैक टैंक, नर्फ स्टाइल ब्लास्टर्स, थॉर का हैमर, त्रिशूल या माइनक्राफ्ट थीम वाली पिचकारियां मांग रहे हैं।”

एक 32 वर्षीय डिजाइन प्रोफेशनल ने बताया, “बच्चों के लिए ऑर्डर करते वक्त इंस्टेंट डिलीवरी ऐप पर ₹2,999 वाली हाई-प्रेशर गन देख ली। इतनी कूल लगी कि खुद के लिए खरीद ली। कोई पछतावा नहीं!” वहीं एक वीडियो प्रोड्यूसर सौरभ कश्यप ने ₹1,800 की माइनक्राफ्ट थीम वाली पिचकारी इंस्टाग्राम स्टोर से मंगवाई और कहा, “यह मेरी सबसे फेवरेट होली खरीद है। ऑफिस पार्टी में सबको यही कन्विंस कर रहा हूं।” यह ट्रेंड ‘किडल्टिंग’ कहलाता है। युवा तनाव, आर्थिक चिंता और ग्लोबल मुश्किलों के बीच बचपन की खुशियां लौटा रहे हैं। सोशल मीडिया रील्स में लोग इन हाई-पावर वॉटर ब्लास्टर्स को फ्लॉन्ट कर रहे हैं। अमेज़न और क्विक कॉमर्स पर भी इलेक्ट्रिक मॉडल्स (₹1,499 से ₹3,000 तक) की बिक्री तेज है।

जयपुर का राजसी गुलाल गोता: इन्फ्लुएंसर्स ने किया रिवाइवल दूसरी तरफ राजस्थान की पिंक सिटी में 300-400 साल पुरानी परंपरा ‘गुलाल गोता’ फिर से छा रही है। पहले यह सिर्फ जयपुर राजघराने तक सीमित थी। लाक (प्राकृतिक रेजिन) से बनी नाजुक गोली, जिसमें हर्बल गुलाल भरा जाता है। फेंकने पर गोली फटती है और नरम रंग बिखरता है—बिना गंदगी या आक्रामकता के।

मणिहार मुस्लिम समुदाय के कारीगर (मणिहारों का रास्ता) रमजान के रोजे रखते हुए भी दिन-रात काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया रील्स और इन्फ्लुएंसर्स (जैसे आशीष वाधवानी) ने इसे वायरल कर दिया। अब लोग खास तौर पर जयपुर जाकर बॉक्स भरकर ले जा रहे हैं क्योंकि शिपिंग में ये टूट जाते हैं। मीडिया और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल डिमांड इतनी ज्यादा है कि कारीगर ऑर्डर्स पूरा नहीं कर पा रहे। दिल्ली, यूपी, एमपी, गुजरात के अलावा विदेशों तक निर्यात हो रहा है। एक बॉक्स (6 पीस) की कीमत अब ₹300 तक पहुंच गई है (पहले ₹50-100 थी)। कारीगर अमजाद खान जैसे लोग कहते हैं, “राजपरिवारों की चीज अब आम लोगों तक पहुंच गई है।”

दोनों ट्रेंड्स का अनोखा मेल शहरी युवा अब दोनों को साथ इस्तेमाल कर रहे हैं—पिचकारियों से पानी का रोमांच और गुलाल गोते से शाही, साफ-सुथरा रंग खेल। फार्महाउस, सोसाइटी और ऑफिस पार्टियों में यह कॉम्बिनेशन पॉपुलर हो रहा है। एक तरफ आधुनिक गैजेट्स, दूसरी तरफ 400 साल पुरानी विरासत। इससे न सिर्फ मस्ती बढ़ रही है बल्कि स्थानीय कारीगरों को भी रोजगार मिल रहा है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह होली दिखाती है—बड़े लोग अब जिम्मेदार लेकिन मजेदार तरीके से त्योहार मना रहे हैं। तो इस होली आप भी ट्राई कीजिए—चाहे महंगी इलेक्ट्रिक पिचकारी हो या जयपुर का राजसी गुलाल गोता। रंगों का त्योहार बड़े बच्चों के लिए भी खास हो गया है!

यह भी पढ़ें: From traffic cameras to phone networks: इजराइल ने कैसे ट्रैक किया खामेनेई को; हत्या पर सोनिया ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, अमेरिका में ट्रंप के हमलों का 52% विरोध

यहां से शेयर करें