‘दि विजडम ट्री स्कूल’ अवैध घोषित: आयकर कानपुर के बेनामी प्रकोष्ठ विभाग ने ग्रेटर नोएडा स्थित ‘दि विजडम ट्री स्कूल’ पर बड़ी कार्रवाई की है। 125 करोड़ रुपये कीमत के इस स्कूल की बिल्डिंग को बेनामी संपत्ति करार दिया गया है। यह प्रदेश में अब तक बेनामी संपत्तियों के मामले में की गई सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है।
कैसे चला पूरा खेल?
स्कूल की बिल्डिंग चार मंजिला और होटल स्टाइल में बनाई गई है। 15 हजार स्क्वायर मीटर में बनी इस इमारत को सतनाम नाम के एक बिल्डर ने बनवाया है, जिसके नोएडा में कई अन्य प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं। विभाग के पास छह महीने पहले एक गुमनाम पत्र आया था, जिसमें इस बिल्डिंग के निर्माण में काले धन के इस्तेमाल की बात कही गई थी। इसके बाद अफसरों ने जांच शुरू की तो काली कमाई की परतें खुलती चली गईं। बताया गया कि बिल्डर ने अपने परिवारीजन और बिजनेस सहयोगियों के साथ मिलकर ‘दि विजडम ट्री स्कूल फाउंडेशन’ नाम की कंपनी बनाई, जिसमें वह खुद भी निदेशक था। पहले तीन बोगस कंपनियां बनाई गईं और अलग-अलग लोगों से नकद लेकर इन कंपनियों के जरिए अरबों रुपये की रकम लोन आदि में दिखाई गई।
जांच में मिले ठोस सबूत
नोएडा की तीन बोगस कंपनियों के जरिये अरबों रुपये की कमाई इसमें खपाई गई थी। नकद लेकर कंपनियों में रुपये लगाने वाले कई लोगों के बयानों में इस गड़बड़ी का साक्ष्य मिला और बिल्डिंग निर्माण में काले धन का खुलासा हुआ।
कुर्की की तैयारी, दस्तावेज जब्त
27 मार्च को नोटिस जारी करके स्कूल की बिल्डिंग को बेनामी करार कर दिया गया है और नोटिस चस्पा भी कर दिया गया है। संपत्ति का मार्केट मूल्य 125 करोड़ है, जिसका मूल्यांकन भी कराया जा चुका है। जल्द ही कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। आयकर विभाग के बेनामी प्रकोष्ठ ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं। इस कार्रवाई से बेनामी संपत्ति रखने वालों में हड़कंप मच गया है। आयकर विभाग अब इन बोगस कंपनियों के नेटवर्क की भी जांच कर रहा है।
क्या होगा आगे?
यह मामला महज एक स्कूल बिल्डिंग तक सीमित नहीं है। तीन फर्जी कंपनियों का जाल, अरबों की नकद रकम और एक पूरा नेटवर्क — आयकर विभाग अब इस पूरे तंत्र की तह तक जाने की तैयारी में है। जल्द ही कुर्की की औपचारिक कार्रवाई के साथ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

