20 फरवरी 2026ः जय हिन्द जनाब न्यूज डेस्क
वाशिंगटन/तेहरान। दुनिया एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमले की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। पश्चिम एशिया में इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा हो चुका है और विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कूटनीति विफल रही तो अगले कुछ दिनों में दुनिया को एक भीषण युद्ध का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका ने क्या-क्या तैनात किया?
बता दें कि यह तैनाती इराक युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती है, जिसमें 100 से अधिक हमलावर विमान और दो एयरक्राफ्ट कैरियर समूह शामिल हैं। अमेरिका का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसका पूरा जंगी बेड़ा पहले से ही मध्य पूर्व में तैनात है। दूसरा कैरियर USS गेराल्ड फोर्ड भी मध्य पूर्व की ओर रवाना हो चुका है। सभी सैन्य बल मार्च के मध्य तक अपनी जगह पहुंच जाएंगे।
समुद्री मोर्चे पर अमेरिका के 12 युद्धपोत मध्य पूर्व क्षेत्र में तैनात हैं, जिनमें अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के तीन Arleigh Burke श्रेणी के विध्वंसक पोत, भूमध्य सागर में दो और स्वतंत्र रूप से तैनात तीन पोत शामिल हैं। इसके अलावा परमाणु पनडुब्बियां भी तैनात की गई हैं।
वायु सेना के मोर्चे पर एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमानों को RAF Lakenheath बेस पर भेजा गया है। इन्हीं F-22 विमानों ने पिछले जून में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान B-2A स्टेल्थ बॉम्बर को सुरक्षा कवच प्रदान किया था। वहीं, पेंटागन ने हजारों अतिरिक्त सैनिक, लड़ाकू विमान, गाइडेड मिसाइल विध्वंसक और अन्य हथियार भी इस क्षेत्र में भेजे हैं जो हमला करने और जवाबी हमलों से बचाव दोनों में सक्षम हैं।
हमला कब होगा? 10 दिन का अल्टीमेटम
19 फरवरी 2026 को रिपोर्टें आईं कि अमेरिका कुछ ही दिनों में ईरान पर सैन्य हमला कर सकता है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि तेहरान को एक समझौता करना होगा। अमेरिकी सेना इस वीकएंड तक हमले के लिए तैयार है, हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है। ट्रंप ने वैश्विक नेताओं को बताया कि अगले 10 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ेगी या नहीं। ट्रंप के एक करीबी सलाहकार को बताया कि अगले कुछ हफ्तों में सैन्य कार्रवाई की 90 प्रतिशत संभावना है।
हमले का निशाना क्या होगा?
यह हमला सिर्फ परमाणु ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। एक लंबे अभियान में ईरान की राज्य और सुरक्षा संस्थाओं को भी निशाना बनाया जा सकता है। हमले का मुख्य फोकस ईरान की मिसाइल प्रणाली और ड्रोन क्षमताओं पर होगा, लेकिन ईरानी शासन नेतृत्व को भी निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिका की मुख्य मांग है कि ईरान अपनी धरती पर यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपनी मिसाइल क्षमताओं पर भी बातचीत करे।
ईरान की प्रतिक्रियाः युद्ध के लिए तैयार
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने चेतावनी दी है कि किसी भी टकराव से व्यापक क्षेत्रीय युद्ध भड़क सकता है। ईरान ने धमकी दी है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर देगा कृ जो दुनिया के कच्चे तेल के प्रमुख मार्गों में से एक है कृ और अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमला करेगा। ईरान ने 5 फरवरी को अपनीKhorramshahr-4 लंबी दूरी की मिसाइल को एक भूमिगत सुविधा में तैनात किया, जो उसके सैन्य सिद्धांत में बदलाव का संकेत है।
पूरी दुनिया पर क्या पड़ेगा असर
तेल और ऊर्जा पर संकटः होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। छमूेजतंबा अगर ईरान इसे बंद करता है तो कच्चे तेल की कीमतें रातोंरात 150 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। भारत, जो ईरान से सस्ता तेल खरीदता रहा है, को भी भारी झटका लगेगा।
भारत पर असर
भारत ने भी इस संभावित संघर्ष को लेकर सतर्कता बरती है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि, महंगाई में उछाल, और पश्चिम एशिया में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा बड़ी चिंताएं हैं। साथ ही भारत के व्यापारिक रास्ते भी प्रभावित होंगे।
वैश्विक आर्थिक संकट
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में चेतावनी दी कि ईरान से जुड़े किसी भी युद्ध के पूरे क्षेत्र में दूरगामी परिणाम होंगे और व्यापक मध्य पूर्व अस्थिर हो सकता है। शेयर बाजारों में गिरावट और वैश्विक मंदी का खतरा मंडरा रहा है।
रूस की चेतावनी
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान पर किसी भी नए अमेरिकी हमले के गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है और कहा है कि पिछले हमलों से पहले से ही परमाणु खतरे का वास्तविक जोखिम था।
अफगानिस्तान का रुख
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि अगर ईरान अनुरोध करे तो अफगानिस्तान उसके साथ सहयोग करने को तैयार है।
क्या कूटनीति बचा सकती है युद्ध?
अमेरिका और ईरान के वार्ताकार मंगलवार को जिनेवा में साढ़े तीन घंटे की अप्रत्यक्ष वार्ता कर चुके हैं, पर बिना किसी स्पष्ट समाधान के। दोनों पक्षों ने कुछ मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति की बात कही, लेकिन विवरण पर अभी बहुत कुछ तय होना बाकी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 28 फरवरी को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मिलेंगे और ईरान के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
जय हिन्द जनाब का विश्लेषण
यह संकट महज ईरान और अमेरिका के बीच का नहीं है। यह एक ऐसी चिंगारी है जो पूरी दुनिया को अपनी लपेट में ले सकती है। तेल की कीमतें, महंगाई, युद्ध की विभीषिका और लाखों निर्दोष लोगों की जानें.. यही दांव पर लगा है। भारत को अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ानी होगी और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अभी से तैयारी करनी होगी।

