युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का आवागमन लगभग रुक गया है, जिससे खाड़ी देशों (दुबई, सऊदी अरब) के लिए निर्यात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। रोजाना औसतन 50 कंटेनर (प्रति कंटेनर 20 लाख रुपये मूल्य) खाड़ी बाजारों के लिए जाते थे, लेकिन अब ये रूट बंद होने से निर्यात शून्य के करीब है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय अग्रवाल और जनरल सेक्रेटरी तरुण चेतवानी ने बताया कि प्लास्टिक ग्रेन्यूल्स (कच्चा माल) की कीमतें 90 से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, क्योंकि पेट्रोकेमिकल उत्पादन प्रभावित है।
पैकेजिंग मटेरियल (डिब्बे, फिल्में) भी 1.5 गुना महंगे हो गए हैं।
परिणामस्वरूप, खिलौनों की कीमतें बाजार में 40-50% तक बढ़ गई हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बच्चों के खिलौने महंगे हो गए हैं। कई फैक्टरियां उत्पादन रोक चुकी हैं या आंशिक रूप से चल रही हैं। निर्यात ऑर्डर रद्द हो रहे हैं, और अगर संकट लंबा चला तो उद्योग कई साल पीछे चला जाएगा।
सरकार से अपील: टॉय इंडस्ट्री ने केंद्र से तत्काल राहत पैकेज, लॉजिस्टिक्स सहायता और वैकल्पिक रूट्स (जैसे अफ्रीका या यूरोप) की तलाश की मांग की है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी सप्लाई चेन सामान्य होने में 1-1.5 महीने लग सकते हैं। यह संकट सिर्फ खिलौनों तक सीमित नहीं प्लास्टिक, जूता, हैंडीक्राफ्ट और अन्य MSME सेक्टर भी प्रभावित हैं, क्योंकि कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल्स की कीमतें आसमान छू रही हैं।
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