The Supreme Court is strict on stray dog attacks: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या पर सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि कुत्ते के काटने से होने वाली हर मौत, चोट या हमले के लिए संबंधित राज्य सरकारों पर भारी मुआवजा ठोका जाएगा। साथ ही, आवारा कुत्तों को खिलाने वालों (डॉग फीडर्स) की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा, “हर कुत्ते के काटने, हर मौत और बच्चों-बुजुर्गों पर हमले के लिए हम राज्य सरकारों पर भारी मुआवजा तय करेंगे, क्योंकि उन्होंने कुछ किया ही नहीं। डॉग फीडर्स को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अगर कुत्तों को खिलाना है तो उन्हें घर ले जाओ, सड़कों पर घूमने और लोगों को डराने-काटने क्यों छोड़ते हो? कुत्ते के काटने का असर आजीवन रहता है।”
कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों की नाकामी को “पूर्ण विफलता” करार दिया और कहा कि 1950 के दशक से इस मुद्दे पर संसद चर्चा कर रही है, लेकिन केंद्र-राज्यों की निष्क्रियता से समस्या हजार गुना बढ़ गई है। बेंच ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के क्रियान्वयन में विफलता पर भी नाराजगी जताई।

फीडर्स की जिम्मेदारी पर सवाल
कोर्ट ने डॉग फीडर्स से पूछा कि वे सड़कों पर कुत्तों को क्यों खिलाते हैं, जिससे वे आक्रामक हो जाते हैं और हमले बढ़ते हैं। बेंच ने सुझाव दिया कि फीडर्स कुत्तों को घर ले जाएं या निर्धारित जगहों पर ही खिलाएं। कोर्ट ने मौजूदा कानूनों में जिम्मेदारी की कमी पर भी टिप्पणी की और कहा कि हमले की स्थिति में जवाबदेही तय करने के लिए नए दिशानिर्देश या “लाइसेंस” जैसी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।

देश में बढ़ते हमले
देश में आवारा कुत्तों की संख्या करोड़ों में है और हर साल हजारों काटने की घटनाएं सामने आती हैं। कई मामलों में बच्चे और बुजुर्ग शिकार बनते हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाया जाए और शेल्टर में रखा जाए।
सुनवाई जारी है और कोर्ट ने सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं। जानकारों का कहना है कि यह फैसला आने वाले समय में आवारा कुत्तों की समस्या पर बड़ा असर डालेगा और राज्य सरकारों को ठोस कदम उठाने पड़ेंगे।

