विवाद की वजह और ताजा घटनाक्रम
• 18 जनवरी की घटना — स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर संगम नोज जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग रोक दी। समर्थकों ने बैरिकेड तोड़े, जिस पर झड़प हुई। स्वामी ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया और धरना शुरू कर दिया। उन्होंने स्नान से इनकार कर दिया।
• नोटिस का आधार — मेला प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट की सिविल अपील (2020) का हवाला दिया, जिसमें 2022 में ज्योतिर्मठ के नए पट्टाभिषेक पर रोक लगाई गई थी। अन्य पीठों के शंकराचार्य और अखाड़ा परिषद उन्हें मान्यता नहीं देते। गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उन्होंने खुद को उत्तराधिकारी घोषित किया था।
• प्रशासन का पक्ष — अधिकारियों ने कहा कि प्रोटोकॉल सिर्फ मान्यता प्राप्त शंकराचार्यों को मिलता है। CCTV फुटेज में समर्थकों को बैरिकेड तोड़ते दिखाया गया।
भारत के चार प्रमुख शंकराचार्य और उनके मठ
आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठें:
• ज्योतिर्मठ (उत्तर, बद्रीनाथ-जोशीमठ): स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (विवादित, सुप्रीम कोर्ट में केस पेंडिंग)।
• द्वारका शारदा पीठ (पश्चिम, गुजरात): स्वामी सदानंद सरस्वती।
• गोवर्धन मठ (पूर्व, पुरी, ओडिशा): स्वामी निश्चलानंद सरस्वती।
• श्रृंगेरी शारदा पीठम (दक्षिण, कर्नाटक): स्वामी भारती तीर्थ।
2025 महाकुंभ में द्वारका और श्रृंगेरी के शंकराचार्य उनके साथ स्नान कर चुके हैं, लेकिन अन्य पीठें मान्यता नहीं देतीं।
सियासी बवाल
कांग्रेस ने BJP पर ‘अपमान’ का आरोप लगाया। पवन खेड़ा और अन्य नेताओं ने सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने स्वामी से फोन पर बात की और समर्थन का पूरा भरोसा जताया। विपक्ष इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ रहा है।
मामला सनातन परंपरा, कोर्ट ऑर्डर और मेले के प्रोटोकॉल पर बड़ा सवाल उठा रहा है। नोटिस का जवाब आने और कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर रहेगी।

