The dream of studying in Ireland is shattered: भारतीय छात्रों ने सुनाई कड़वी हकीकत, बढ़ती नामांकन के बावजूद नौकरी-वीजा संकट गहराया

The dream of studying in Ireland is shattered: अमेरिका में वीजा अनिश्चितता और ब्रिटेन में पोस्ट-स्टडी वर्क विकल्प बंद होने के बाद आयरलैंड भारतीय छात्रों के लिए तेजी से पसंदीदा विकल्प बन रहा है। दिसंबर 2025 की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024-25 शैक्षणिक सत्र में भारतीय छात्रों के नामांकन में 30% की बढ़ोतरी हुई, कुल अंतरराष्ट्रीय छात्र 44,500 पहुंच गए, जिसमें भारतीय 20% से अधिक हैं—लगभग 9,175 छात्र। लेकिन कई छात्रों के लिए यह सपना कर्ज, बेरोजगारी, वीजा अस्वीकृति और कभी-कभी नस्लवाद तक में बदल गया है।

मीडिया की हालिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स में कई भारतीय छात्रों ने चेतावनी दी है—“यहां मत आओ”। रेडिट, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर जनवरी 2026 में ऐसे पोस्ट्स तेजी से शेयर हो रहे हैं, जहां छात्रों ने नौकरी बाजार की कठिनाई, स्पॉन्सरशिप की कमी और हाउसिंग संकट का जिक्र किया।

क्यों चुना आयरलैंड, लेकिन हकीकत अलग
कई छात्रों ने बताया कि अमेरिका महंगा और अनिश्चित, ब्रिटेन महंगा, कनाडा संतृप्त लग रहा था, इसलिए आयरलैंड सुरक्षित लगा—अंग्रेजी बोलने वाला, यूरोपीय संघ का सदस्य, गूगल जैसी कंपनियों के यूरोपीय हेडक्वार्टर्स। ट्यूशन फीस कम और टेक जॉब्स की उम्मीद ने आकर्षित किया।
लेकिन पहुंचने के बाद:

• शिक्षा लोन का बोझ: अधिकांश छात्रों ने बड़ा लोन लिया। एक छात्र (कबीर) ने कहा, “लोन की राशि दिमाग से नहीं उतरती। पार्ट-टाइम जॉब के लिए घंटों ट्रैवल और खड़े रहना पड़ता है, स्किल्स पर फोकस नहीं कर पाते।” आयशा ने 3,200 आवेदनों के बाद सिर्फ 15 इंटरव्यू की बात कही, अब बेरोजगारी से डर लगता है।
• नौकरी बाजार की कठोरता: सैकड़ों आवेदन एक पद के लिए। कंपनियां EU नागरिकों को प्राथमिकता देती हैं, स्पॉन्सरशिप दुर्लभ। आर्यन ने कहा, “पहले ज्यादातर ग्रेजुएट्स को स्पॉन्सर्ड जॉब मिल जाती थी, अब असाधारण और भाग्यशाली होना पड़ता है।” कई अनुभवी टेक प्रोफेशनल्स भी संघर्ष कर रहे हैं।
• वीजा स्पॉन्सरशिप की समस्या: नियोक्ता अतिरिक्त पेपरवर्क और लागत से बचते हैं। कई जॉब्स में “EU वीजा या Stamp 4 जरूरी” लिखा होता है। एक छात्रा (लीना) ने कहा, “प्रोफाइल वीजा आधार पर रिजेक्ट होती है, क्वालिफिकेशन पर नहीं।”
• हाउसिंग और रहन-सहन संकट: छोटे कमरे का किराया 70-80 हजार रुपये महीना। हाउसिंग शॉर्टेज के कारण धोखाधड़ी आम। पब्लिक ट्रांसपोर्ट कमजोर, ग्रॉसरी के लिए किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। मौसम ठंडा-गीला, लागत ऊंची।
• नस्लवाद और सुरक्षा चिंता: कई छात्रों ने街 पर धमकियां, मौत की धमकी तक की बात कही। कबीर ने तीन घटनाएं बताईं, जहां नाबालिगों ने घेर लिया। कार्यस्थल पर भी भेदभाव। 2025 की सर्वे में 38% प्रवासियों ने नस्ल आधारित भेदभाव महसूस किया।
• मानसिक स्वास्थ्य पर असर: अकेलापन, चिंता, डिप्रेशन आम। आर्यन ने कहा, “ठंडा, गीला और अकेला देश। परिवार को निराश करने के डर से मदद नहीं मांग पाते।” कई छात्र भारत लौटने से डरते हैं, क्योंकि वहां भी जॉब मार्केट प्रतिस्पर्धी।

छात्रों की सलाह
भावी छात्रों को चेतावनी: “बिना EU पासपोर्ट या असाधारण स्किल्स के मुश्किल। भाग्य बड़ा रोल खेलता है।” विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेंड के पीछे न भागें, पूरी जानकारी लें।
आयरलैंड सरकार और विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। यह मुद्दा सोशल मीडिया पर गरमाया हुआ है, कई छात्र अपनी कहानियां शेयर कर दूसरों को सतर्क कर रहे हैं।

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