The CP administration hasn’t learned its lesson: ग्रेटर नोएडा में फिर कार गिरी खुले नाले में, युवराज की मौत के बाद भी नहीं बदले हालात

The CP administration hasn’t learned its lesson: ग्रेटर नोएडा में खुले नालों का खतरा थमने का नाम नहीं ले रहा। युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के डेढ़ महीने बाद भी हादसे जारी हैं, और हर बार एक ही कारण सामने आता है: न बैरिकेडिंग, न रिफ्लेक्टर, न चेतावनी बोर्ड।

ताज़ा हादसा — बिसरख, ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में देर रात एक तेज़ रफ्तार कार अनियंत्रित होकर खुले नाले में जा गिरी। सूचना मिलते ही फायर विभाग और पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और किसी तरह कार को बाहर निकाला। यह मामला बिसरख थाना क्षेत्र के हनुमान मंदिर की तरफ जाने वाली सड़क का है। गनीमत रही कि घटना में चालक को कोई चोट नहीं आई। हादसे वाली जगह किसी तरह की बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर नहीं लगा था।

दूसरा हादसा — गैलेक्सी गोल चक्कर के पास
गैलेक्सी गोल चक्कर से हनुमान मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर रविवार देर रात करीब नौ बजे एक और बड़ा हादसा टला। तेज़ रफ्तार स्विफ्ट कार अनियंत्रित होकर सड़क से सटे खुले नाले में जा गिरी। पुलिस और फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने सीढ़ियों की मदद से कार चालक को आधे घंटे में बाहर निकाल लिया, जबकि कार को क्रेन से निकाला गया। प्राथमिक जांच में सामने आया कि चालक तेज़ रफ्तार में था और मोड़ लेने के बजाए सीधे चला गया, जहाँ सड़क नाले के पास खत्म हो रही थी। नाले के पहले कोई बैरिकेड नहीं लगा हुआ था। पुलिस ने आरोप लगाया कि चालक नशे में था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर वाहन चालक अक्सर रास्ता भटक जाते हैं।

पृष्ठभूमि — युवराज मेहता की मौत का दर्द अभी ताज़ा
16 जनवरी की रात 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से लौट रहे थे। सेक्टर-150 में एटीएस ली ग्रैंडियोस के पास कोहरे में उनकी कार नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से लबालब भरे बेसमेंट में जा गिरी थी। पुलिस, दमकल, SDRF और NDRF की टीमें साढ़े चार घंटे रेस्क्यू करती रहीं, लेकिन 30 फीट गहरे पानी से निकाले जाने के बाद अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने तहरीर में बताया कि सेक्टर-150 के लोग नोएडा प्राधिकरण से पहले भी कई बार मजबूत बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड लगाने की मांग कर चुके थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बावजूद हालात जस के तस
युवराज की मौत के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने और जगह-जगह रिफ्लेक्टर लगाने की बात कही थी।  लेकिन ताज़ा हादसे यह साबित कर रहे हैं कि ये कदम महज खानापूर्ति के लिए ही बने थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेक्टर-150 की घटना के बाद भी प्राधिकरण खुले नालों को ढंकने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि कई बार शिकायत की जा चुकी है।

सवाल वही — जिम्मेदार कौन?
हर हादसे के बाद प्रशासन जागता है, बैठकें होती हैं, आश्वासन मिलते हैं — और फिर वही लापरवाही। ग्रेटर नोएडा के खुले नाले अब सिर्फ बुनियादी ढाँचे की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का सबसे बड़ा सवाल बन चुके हैं।

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