The controversy over the Developed India-GRAMG Bill continues: राष्ट्रपति अभिभाषण के दौरान हंगामा, विपक्ष ने की वापसी की मांग; सरकार ने बताया क्रांतिकारी कदम

The controversy over the Developed India-GRAMG Bill continues: संसद के बजट सत्र की शुरुआत बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई। अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों और नीतियों का विस्तार से जिक्र हुआ, लेकिन जैसे ही राष्ट्रपति ने ग्रामीण रोजगार और विकास के लिए लाए गए नए ‘विकसित भारत-जी राम जी कानून’ (G-RAM-G Act) का उल्लेख किया, विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष ने ‘वापस लो-वापस लो’ और ‘महात्मा गांधी का अपमान बंद करो’ जैसे नारे लगाए। कुछ मिनटों तक चले हंगामे के बाद सदन शांत हुआ और अभिभाषण पूरा हुआ।

गांधीजी के नाम को हटाकर ग्रामीण गरीबों पर बोझ
अभिभाषण के बाद लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव की मांग की, लेकिन स्पीकर और चेयरमैन ने इसे खारिज कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह कानून मनरेगा की भावना के खिलाफ है और गांधीजी के नाम को हटाकर ग्रामीण गरीबों पर बोझ डाला जा रहा है। राहुल गांधी ने इसे ‘सांप्रदायिक एजेंडा’ करार दिया। सपा, टीएमसी और डीएमके ने भी तीखा विरोध जताया। दूसरी ओर, भाजपा संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून को ‘ग्रामीण भारत की क्रांति’ बताया और कहा कि यह राज्यों के साथ मिलकर अधिक कुशल और पारदर्शी रोजगार योजना है।

कानून की मुख्य विशेषताएं और विवाद के कारण
पिछले सत्र में पारित इस कानून को मनरेगा की जगह लाया गया है। इसके तहत:
• ग्रामीण क्षेत्रों में 150 दिन का गारंटीड रोजगार।
• वित्तीय भार का 30% हिस्सा राज्यों पर।
• डिजिटल मॉनिटरिंग और स्किल डेवलपमेंमेंट पर जोर।
• नाम में महात्मा गांधी का उल्लेख न होना प्रमुख विवाद।
विपक्ष का आरोप है कि गांधीजी का नाम हटाना ऐतिहासिक अपमान है और राज्यों पर बोझ डालना संघीय ढांचे का उल्लंघन। सरकार का दावा है कि नया नाम ‘ग्रामीण आत्मनिर्भर मिशन-गांधी’ की भावना को बनाए रखता है और यह अधिक प्रभावी होगा। कई गैर-भाजपा शासित राज्यों ने कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी की है।

अभिभाषण में राष्ट्रपति ने अर्थव्यवस्था, रक्षा, डिजिटल इंडिया और विकसित भारत@2047 का भी जिक्र किया। सत्र में बजट 1 फरवरी को पेश होगा। विपक्ष ने बेरोजगारी, महंगाई और मणिपुर हिंसा पर चर्चा की मांग की है। हंगामे के बावजूद सत्र सुचारु रूप से आगे बढ़ रहा है और धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस कल से शुरू होगी। राजनीतिक गलियारों में इस कानून को लेकर तनाव बना हुआ है।

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