नोएडा प्राधिकरण का धारा 10 नोटिस, जवाब न देने पर बढ़ सकती है मुश्किलें, जानिए कैसे हो समाधान

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नोएडा। नोएडा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर संपत्ति मालिकों, बिल्डरों और संस्थानों को धारा 10 के तहत नोटिस जारी किए जाते हैं। यह नोटिस आमतौर पर लीजडीड के नियमों के उल्लंघन, अवैध निर्माण, भूमि उपयोग में बदलाव, बकाया शुल्क या प्राधिकरण की शर्तों का पालन न करने की स्थिति में भेजा जाता है। यदि नोटिस का समय पर और संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता, तो इसके गंभीर प्रशासनिक और कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

धारा 10 का उद्देश्य क्या है
नोएडा प्राध्किारण धारा 10 का नोटिस संबंधित पक्ष को यह अवसर देने के लिए जारी किया जाता है कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके और यह बताए कि क्यों उसके खिलाफ कार्रवाई न की जाए। इसे ‘शो-कॉज नोटिस’ भी कहा जाता है। इसका मकसद बिना सुने सीधे कार्रवाई करने के बजाय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करना होता है। हालांकि नोटिस मिलने वाला आवंटी यदि खुद की स्थिति को सुधर लेता है तो नोटिस खत्म भी हो सकता है।

जवाब न देने पर पहली कार्रवाई
यदि तय समय-सीमा के भीतर नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया जाता, तो नोएडा प्राधिकरण यह मान सकता है कि संबंधित पक्ष के पास अपने बचाव में कोई ठोस कारण नहीं है। ऐसी स्थिति में प्राधिकरण एकतरफा (म्Û-चंतजम) निर्णय ले सकता है और अगली कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

सीलिंग और उपयोग पर रोक
धारा 10 नोटिस की अनदेखी करने पर प्राधिकरण संबंधित संपत्ति को सील कर सकता है। खासकर अवैध निर्माण या भूमि उपयोग में नियमों के उल्लंघन के मामलों में भवन को आंशिक या पूर्ण रूप से सील कर दिया जाता है, जिससे उसका व्यावसायिक या आवासीय उपयोग तुरंत बंद हो सकता है।

बुलडोजर की कार्रवाई
यदि मामला गंभीर अवैध निर्माण से जुड़ा हो और नोटिस के बावजूद सुधार नहीं किया जाए, तो प्राधिकरण ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई भी कर सकता है। इसमें अवैध हिस्से या पूरे निर्माण को हटाया जा सकता है। इस दौरान होने वाला खर्च भी संबंधित व्यक्ति से वसूला जा सकता है।

आर्थिक दंड और बकाया वसूली
धारा 10 के नोटिस का जवाब न देने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही यदि प्राधिकरण का कोई बकायाकृजैसे लीज रेंट, पेनल्टी या अन्य शुल्ककृलंबित है, तो उसे भू-राजस्व की तरह वसूली के लिए भेजा जा सकता है, जिससे कुर्की जैसी कार्रवाई संभव है।

कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलता है
लगातार अनदेखी की स्थिति में मामला अदालत या सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ले जाया जा सकता है। इससे संबंधित व्यक्ति को कानूनी लड़ाई, अतिरिक्त खर्च और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की मानें तो
इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि धारा 10 का नोटिस मिलने पर उसे हल्के में न लें। तय समय में लिखित जवाब देना, जरूरी दस्तावेज संलग्न करना और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सलाह लेना बेहद जरूरी है। कई मामलों में समय पर जवाब देने और नियमों के अनुरूप सुधार करने से बड़ी कार्रवाई टाली जा सकती है।

 

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