यूपी सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला शहर: फिर भी नागरिकों की ज्वलंत समस्याएं, सीईओ और डीसीपी बने मुकदर्शक

The city that generates the highest revenue for the UP government: नोएडा अथॉरिटी उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला शहर है, लेकिन यहां रहने वाले मिडिल क्लास परिवार हर रोज साफ-सफाई, सड़कें, नाले, बिजली और आवास की समस्याओं से जूझ रहे हैं। शहर की गंदगी, गार्बेज एजेंसी की बार-बार हड़ताल, मुख्य सड़कों पर गड्ढे, नई बिजली नीति की असुविधाएं, बिना बारिश भरे नाले और मिडिल क्लास के लिए कोई योजना न होने की शिकायतें अब चरम पर हैं। लेकिन नए सीईओ कृष्णा करुणेश और डीसीपी साद मिया खान ने इन मुद्दों पर क्या सक्रिय रुख अपनाया है। आइए जानते हैं ताजा हालात और अधिकारियों के कदम।

1. सफाई व्यवस्था चरमराई, गंदगी का बोलबाला
नोएडा के कई सेक्टरों में कचरा सड़कों पर पड़ा रहता है। हाल ही में (मार्च 2026) सीईओ कृष्णा करुणेश ने सेक्टर 8, 63 समेत कई इलाकों का निरीक्षण किया। उन्होंने 6 सफाई कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी, कुछ कर्मचारियों की सैलरी रोकी और गार्बेज एजेंसी M/s AG Enviro Infra Project Pvt Ltd पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया। सीईओ ने साफ कहा, “हर दिन सुबह 10 बजे तक गार्बेज कलेक्शन पूरा होना चाहिए, वरना जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।” उनका लक्ष्य है – “नोएडा को ग्रीन एंड क्लीन बनाना”। लेकिन इस सब के बाद भी नोएडा के निवासी गंदगी की मार झेल रहे है।

2. गार्बेज एजेंसी बार-बार स्ट्राइक पर
हाल ही में अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के करीब 200 कर्मचारियों ने नोएडा अथॉरिटी ऑफिस के बाहर हड़ताल की। वे स्वास्थ्य विभाग के वर्क सर्कल में विलय के खिलाफ थे, सफाई के साथ सिविल वर्क भी थोपे जा रहे हैं। कचरा उठाने में देरी से सेक्टर 18, 91, 92, 96 में ढेर लग गए है। सीईओ करुणेश ने सख्ती दिखाई है, दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई और एजेंसी पर पेनल्टी भी लगाया। उन्होंने कहा, “डोर-टू-डोर कलेक्शन अनिवार्य है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।” फिर अभी तक कुछ नहीं हुआ है।

3. मुख्य सड़कों पर गड्ढे, जान का खतरा
नोएडा अथॉरिटी ने ₹250 करोड़ की बड़ी योजना मंजूर की है – 150 किमी सड़कें अप्रैल 2026 तक रिसर्फेसिंग। सीईओ करुणेश ने कहा, “पॉटहोल-फ्री रोड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएंगे।” काम सर्कल-वार टेंडर हो रहे हैं। पहले से ही कैलाश रोड, जीझोर, ईएसआई रोड और सेक्टर 22-70 में पॉटहोल भरने का काम शुरू कर दिया है।

4. विद्युत विभाग की नई नीति से भारी असुविधा
यूपीपीसीएल का अर्बन रिस्ट्रक्चरिंग प्लान (URP – नवंबर 2025 से लागू) अब समस्या बन गया है। पहले लोकल एसडीओ पर शिकायत होती थी, अब सेंट्रलाइज्ड हेल्पडेस्क पर जाना पड़ता है जिसके कारण अलग-अलग सेक्टरों में काउंटर, लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई है। बिलिंग, मीटर और शिकायतों के लिए उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार। राष्ट्रीय स्तर पर भी Electricity (Rights of Consumers) Amendment Rules 2026 (अक्टूबर 2026 से) के ड्राफ्ट में ToD टैरिफ, स्मार्ट मीटर और बिलिंग नियमों पर विवाद है। यूपी राज्य बिजली उपभोक्ता परिषद ने घरेलू और मिडिल क्लास पर बोझ बढ़ने का विरोध किया। सीईओ करुणेश ने इन मुद्दों पर भी RWA मीटिंग्स में चर्चा शुरू कर दी है।

5. मुख्य नाले बिना बारिश भरे हुए
सीईओ के हालिया निरीक्षण में सेक्टर 8, 63 और अन्य जगहों पर नालों में कचरा भरा मिला। उन्होंने ड्रेन क्लीनिंग पर सख्ती की। पहले टेक्नी की मौत (जनवरी 2026) के बाद ओपन ड्रेन पर बारिकेडिंग और कवरिंग के निर्देश दिए गए थे। अब भी सेक्टर 32A, 105 जैसे इलाकों में समस्या बनी हुई है, लेकिन अथॉरिटी ने कंक्रीट स्लैब और रिपेयर का काम तेज कर दिया है।

6. मिडिल क्लास के लिए कोई योजना नहीं?
नोएडा अथॉरिटी MIG (मिडिल इनकम ग्रुप) स्कीम चला रही है, सेक्टर 44, 47, 99, 122 आदि में प्लॉट और फ्लैट ई-ऑक्शन से। PMAY-Urban भी जुड़ा है। लेकिन निवासी आरोप लगाते हैं कि ज्यादातर योजनाएं पूंजीपतियों के लिए हैं। नए सीईओ कृष्णा करुणेश ने ओपन-डोर पॉलिसी शुरू की जो हर महीने अलग-अलग सोसाइटी में RWA के साथ बैठक, शिकायतें सुनना और प्रोजेक्ट क्लियर करना होगा। उन्होंने कहा, “RWA सदस्यों को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे, सिविल डिसरिपेयर ठीक करेंगे।” लेकिन यह भी मामला अधर में लटका हुआ है।

डीसीपी साद मिया खान का रुख
गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के डीसीपी (नोएडा) साद मिया खान ने इन सिविल मुद्दों पर सीधा बयान नहीं दिया है लेकिन ट्रैफिक और लॉ एंड ऑर्डर पर सक्रिय नज़र आ रहे हैं। फरवरी 2026 में उन्होंने पब्लिक ड्रिंकिंग ड्राइव चलाई और एक्सपो जैसी घटनाओं में सुरक्षा सुनिश्चित की। पॉटहोल और ओपन ड्रेन से दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस सतर्क है। डीसीपी ने कहा, “पब्लिक स्पेस सुरक्षित रखना हमारा काम है।”

नोएडा के निवासी अब उम्मीद कर रहे हैं कि सीईओ करुणेश की “जीरो टॉलरेंस” पॉलिसी और डीसीपी खान की सुरक्षा व्यवस्था से शहर बदलेगा। अथॉरिटी ने अप्रैल तक सड़कें, सफाई और ड्रेन ठीक करने की डेडलाइन दी है। लेकिन सवाल उठता है, क्या ये कदम स्थायी होंगे या फिर पुरानी समस्याएं लौट आएंगी? नोएडा की आवाज अब यूपी सरकार तक पहुंच चुकी है, राजस्व देने वाला शहर अब सुविधाएं भी मांग रहा है!

यहां से शेयर करें