The Ajmer Sharif Dargah controversy deepens: हिंदू प्रतीकों को मिटाने का आरोप, एडवोकेट डॉ. एपी सिंह ने प्रशासन को सौंपा मांग पत्र

The Ajmer Sharif Dargah controversy deepens: अजमेर शरीफ दरगाह को लेकर चल रहा विवाद और तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एपी सिंह ने आरोप लगाया है कि दरगाह परिसर में मौजूद प्राचीन हिंदू धार्मिक प्रतीकों को जानबूझकर मिटाया जा रहा है। उन्होंने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को मांग पत्र सौंपकर तत्काल कार्रवाई की गुहार लगाई है। सिंह ने कहा कि याचिका स्वीकार होने के बाद से रात-दिन खुदाई और ग्राइंडिंग का काम चल रहा है, जिससे स्वस्तिक, ओम, कमल का फूल, नंदी, गाय-बछड़े और “ओम नमः शिवाय” जैसे प्रतीकों को नष्ट किया जा रहा है।

अदालती मामला और याचिका
जनवरी 2026 में महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर की सिविल कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया गया कि अजमेर शरीफ दरगाह मूल रूप से एक प्राचीन शिव मंदिर है और इसके नीचे शिवलिंग मौजूद है। याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वेक्षण की मांग की गई। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। यह दूसरी याचिका है, इससे पहले 2024 में भी इसी तरह का दावा किया गया था।

सबूतों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप
एडवोकेट एपी सिंह ने कहा कि याचिका स्वीकार होने के बाद से दरगाह परिसर में तेजी से काम शुरू हो गया, जिसका मकसद सबूत मिटाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू प्रतीकों को ग्राइंडिंग मशीन से मिटाया जा रहा है या पेंट से ढक दिया जा रहा है। सिंह ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सबूत हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे।

प्रमुख मांगें
मांग पत्र में सिंह ने निम्नलिखित मांगें की हैं: दरगाह परिसर के सभी संभावित सबूतों की तत्काल वीडियोग्राफी करवाई जाए। ASI की टीम से जांच करवाई जाए ताकि तथ्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। सबूतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सिंह ने विश्वास जताया कि राजस्थान सरकार, केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग सनातन धर्म के अनुयायियों को न्याय दिलाएंगे और सबूतों को सुरक्षित रखेंगे।

विवाद की पृष्ठभूमि
अजमेर शरीफ दरगाह सूफी संत ख्वाजा मोइनुदन हसन चिश्ती की दरगाह है, जो दुनिया भर में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रहा है। हिंदू संगठनों का दावा है कि यह स्थान प्राचीन काल में “अजयमेरु” के नाम से जाना जाता था और यहां शिव मंदिर था। यह मामला धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा होने के कारण काफी विवादास्पद है। फिलहाल कोर्ट में सुनवाई जारी है और प्रशासन ने किसी तरह की टिप्पणी से इनकार किया है।
विवाद बढ़ने से दोनों समुदायों में तनाव की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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