The ‘5 km game’ for nursery admissions in Delhi: माता-पिता अच्छी सीट के लिए किराए पर ले रहे मकान

The ‘5 km game’ for nursery admissions in Delhi: दिल्ली के माता-पिता अपने छोटे बच्चों के नर्सरी एडमिशन के लिए स्कूल से 5 किलोमीटर के दायरे में मकान किराए पर ले रहे हैं। शिक्षा निदेशालय (DoE) के दिशानिर्देशों में दूरी को मिलने वाले अंकों के कारण यह चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे परिवारों पर भावनात्मक और आर्थिक बोझ पड़ रहा है। आज कई निजी स्कूलों ने 2026-27 सत्र के लिए पहली चयन सूची जारी की है, जिससे यह मुद्दा और चर्चा में आ गया है।

दूरी अब तय करती है किस्मत
DoE के नियमों के तहत निजी स्कूल दूरी के आधार पर 20 से 55 अंक तक दे सकते हैं। कई लोकप्रिय स्कूलों ने तो दूरी को 80 अंक तक का वेटेज दिया है। वसंत विहार, ग्रेटर कैलाश, रोहिणी और द्वारका जैसे इलाकों में अच्छे स्कूलों के आसपास यह प्रतिस्पर्धा सबसे ज्यादा है।
एक दक्षिण दिल्ली की एडमिशन कंसल्टेंट ने बताया, “लोकप्रिय स्कूलों में दूरी अब सिर्फ एक क्राइटेरिया नहीं, बल्कि मुख्य क्राइटेरिया बन गया है। अगर यहां अंक गंवाए तो बाकी सब बेकार।”

किराए का बाजार गर्म
नवंबर-जनवरी में प्रॉपर्टी ब्रोकरों का कारोबार चमक उठता है। ग्रेटर कैलाश के एक ब्रोकर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अचानक 6 महीने के लीज की डिमांड बढ़ जाती है। बिजली बिल सहित पूरा डॉक्यूमेंट चाहिए।” किराए रातोंरात बढ़ जाते हैं – 45 हजार वाला फ्लैट 65 हजार का हो जाता है। कुछ मकान मालिक तो ‘स्कूल सीजन प्रीमियम’ भी वसूलते हैं।
रोहिणी के एक पिता ने बताया कि उन्होंने एक साल का लीज लेते हुए 2.8 लाख रुपये अग्रिम दे दिए, जबकि असल में वहीं पुराने घर में रहते हैं। “यह बेतुका है, लेकिन रिजेक्शन से बेहतर है।”

सिर्फ कागजों पर बदल रहा पता
कई परिवार असल में नहीं बल्कि सिर्फ कागजों पर पता बदलते हैं। एक माता-पिता ने कहा, “हमने लीज रजिस्टर कराई, आधार बदला, गैस कनेक्शन लिया – लेकिन वहां कभी सोए नहीं।” कुछ परिवार अस्थायी रूप से शिफ्ट हो जाते हैं, जिससे बच्चों और घरवालों को भावनात्मक तनाव होता है।
द्वारका की एक गृहिणी अनीता ने बताया, “तीन महीने हम स्टूडेंट्स की तरह रहे। बच्चा बार-बार पूछता था कि नाना का घर कहां गया।”

स्कूलों का पक्ष: हम सिर्फ नियम मानते हैं
स्कूल प्रशासक कहते हैं कि वे सिर्फ DoE के नियमों का पालन करते हैं। दक्षिण दिल्ली के एक स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर ने कहा, “कागजों पर पता वैध है तो हम इरादा जांच नहीं सकते।” कुछ स्कूल सरप्राइज विजिट करते हैं, तो कुछ सिर्फ एफिडेविट पर भरोसा करते हैं। जांच की अनियमितता से माता-पिता में डर बना रहता है।

नर्सरी के लिए इतना तनाव क्यों?
माता-पिता हैरानी जताते हैं कि कॉलेज नहीं, सिर्फ नर्सरी के लिए इतना दबाव क्यों। वसंत विहार की नेहा कहती हैं, “मेरा बच्चा तो सिर्फ सुरक्षित जगह पर खेलना चाहता है।” लेकिन दिल्ली में नर्सरी एडमिशन को कई परिवार भविष्य का द्वार मानते हैं – पीयर ग्रुप, स्कूल कंटिन्यूटी और सोशल स्टेटस तक तय करने वाला।

माता-पिता चाहते हैं सुधार
अधिकांश माता-पिता की मांग है:
• दूरी के अंकों पर कैप या कमी
• पड़ोस के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधार
• पारदर्शी सत्यापन
• 3 साल के बच्चों के लिए कम क्राइटेरिया
जब तक बदलाव नहीं होता, ‘5 किमी खेल’ जारी रहेगा – वह खेल जो बच्चे नहीं, उनके माता-पिता खेल रहे हैं, सिर्फ अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए।

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