Tensions are running high in JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र संघ (JNUSU) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच पिछले रात हुई हिंसक झड़प के बाद कैंपस तनावपूर्ण बना हुआ है। JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुलपति संतिश्री धुलिपुडी पंडित पर दलितों और पिछड़ों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने तथा प्रशासन के इशारे पर ‘गुंडों’ द्वारा हमला कराने का आरोप लगाया। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में 13 फरवरी को UGC इक्विटी रेगुलेशन के समर्थन में हुए प्रदर्शन के दौरान यूट्यूबर रुचि तिवारी पर कथित जातिगत हमले के बाद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मेघा लवरिया ने खुद को धमकियों का शिकार बताया है।
JNUSU के अनुसार, पिछले दो हफ्तों से छात्र UGC (Promotion of Equity in Higher Educational Institutions) Regulations 2026 के खिलाफ हड़ताल और जनरल बॉडी मीटिंग्स (GBMs) कर रहे हैं। ये रेगुलेशन सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनवरी में रोक दिए गए थे। अदिति मिश्रा ने आरोप लगाया कि कुलपति ने 16 फरवरी को एक पॉडकास्ट में दलितों-बहुजन समुदाय के प्रति भद्दी टिप्पणियां कीं, जिसके विरोध में ‘समता जुलूस’ (Equality March) निकाला गया। मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पत्थर और लोहे की रॉड से हमला किया गया। कई छात्र घायल हुए। JNUSU का दावा है कि जेएनयू सुरक्षा और दिल्ली पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
JNUSU नेताओं ने ABVP पर प्रशासन के साथ मिलकर आंदोलन को बदनाम करने और हिंसा फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे नकाब पहनकर हिंसा में शामिल नहीं थे और उनके सभी आरोप झूठे हैं। साथ ही, चार JNUSU पदाधिकारियों (अदिति मिश्रा, गोपिका के बाबू, सुनील यादव, दानिश अली) को दो सेमेस्टर के लिए निलंबित (रस्टिकेट) कर कैंपस से बाहर करने का नोटिस दिया गया है, जिसे वे अन्यायपूर्ण बता रहे हैं। यह निलंबन नवंबर 2025 में लाइब्रेरी में फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRT) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित तोड़फोड़ पर आधारित है।
ABVP ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि JNUSU और वामपंथी संगठनों (AISA आदि) ने पहले से प्लान्ड अटैक किया। उनका दावा है कि 300-400 की भीड़ ने मास्क लगाकर हमला किया, ABVP छात्रों को पढ़ाई के दौरान निशाना बनाया और आग बुझाने वाले यंत्र फेंके। ABVP ने इसे ‘आतंक की रात’ करार दिया और कार्रवाई की मांग की। इस पूरे विवाद की जड़ UGC रेगुलेशन में है, जिसके समर्थन-विरोध में कैंपस राजनीति गरमाई हुई है।
DU घटना 13 फरवरी को DU उत्तर कैंपस के आर्ट्स फैकल्टी में UGC रेगुलेशन के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान यूट्यूबर और इन्फ्लुएंसर रुचि तिवारी पर कथित हमला हुआ था। रुचि ने दावा किया कि भीड़ ने उनका उपनाम पूछकर ‘तिवारी-ब्राह्मण’ बताते हुए उन्हें निशाना बनाया, कपड़े फाड़ने, रेप थ्रेट और ‘नंगा परेड’ की धमकियां जैसी धमकिया दी गई थी। उन्होंने AISA-SFI (कई JNU छात्रों समेत) पर आरोप लगाया। पुलिस ने दोनों पक्षों से FIR दर्ज की है।
रुचि की सहयोगी और DU पूर्व छात्रा-सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने एक इंटरव्यू/वीडियो में बताया कि उन्हें इंस्टाग्राम पर भीम आर्मी समर्थकों और ‘सो-कॉल्ड पीसफुल कम्युनिटी’ से भारी धमकियां मिल रही हैं। इन्फ़्लुएंसर ने UGC जैसे ‘काले कानूनों’ का विरोध करते हुए कहा कि सवर्ण समाज (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) को एकजुट होना चाहिए। उनका तर्क है कि ये कानून जातिवाद और लव जिहाद बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा कि असली दुश्मन ‘जिहादी मानसिकता’ वाले लोग हैं, न कि वर्ण व्यवस्था के अंदर के लोग। इन्फ़्लुएंसर ने रुचि तिवारी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि JNU के कुछ छात्रों ने रुचि को ब्राह्मण उपनाम के आधार पर टारगेट किया। उन्होंने JNU छात्रों को ‘ढपली गैंग’ और ‘जिहादी मानसिकता’ वाला बताया तथा SC/ST एक्ट के दुरुपयोग का आरोप लगाया कि जनरल कैटेगरी वालों को फंसाने की धमकी दी जाती है। मेघा ने स्पष्ट किया कि वे छात्रा के रूप में नहीं, बल्कि डिजिटल मीडिया प्रतिनिधि और रुचि के समर्थक के रूप में वहां गई थीं।
दोनों घटनाएं UGC रेगुलेशन, जाति राजनीति और कैंपस हिंसा से जुड़ी हुई हैं। दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ABVP और JNUSU दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की जा रही है। छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल बनाए रखना चुनौती बना हुआ है।

