Tarique Rahman PM Oath: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान आज शाम प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं, लेकिन शपथ ग्रहण समारोह के बीच जुलाई चार्टर को लेकर गंभीर राजनीतिक तनाव उभर कर सामने आया है। जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजंस पार्टी (एनसीपी) ने बीएनपी पर “फासीवादी” होने का आरोप लगाते हुए सड़क आंदोलन की धमकी दी है। सुबह सांसदों की शपथ हो चुकी है, लेकिन जुलाई चार्टर से जुड़ी संवैधानिक सुधार परिषद की शपथ पर बीएनपी ने इनकार कर दिया, जिससे गठबंधन में दरार साफ दिख रही है।
शपथ ग्रहण समारोह की मुख्य बातें
सुबह 10 बजे: नवनिर्वाचित 297 सांसदों ने जतिया संसद भवन के साउथ प्लाजा में शपथ ली। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने शपथ दिलाई। बीएनपी के सांसदों ने सबसे पहले शपथ ली, उसके बाद जमात-ए-इस्लामी, एनसीपी और अन्य सहयोगी दलों के।
दोपहर 11:15 बजे: बीएनपी संसदीय दल की बैठक में तारिक रहमान को सर्वसम्मति से संसद में पार्टी का नेता चुना गया। शाम 4 बजे (अपेक्षित): राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन तारिक रहमान और उनकी शुरुआती कैबिनेट को शपथ दिलाएंगे। समारोह में करीब 1200 मेहमान शामिल होंगे। बीएनपी ने 20 साल बाद सत्ता में वापसी की है। पार्टी ने 13वीं संसदीय चुनाव में 209 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगियों ने कुछ और। जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं।
जुलाई चार्टर पर विवाद और संकट
12 फरवरी को हुए चुनाव के साथ जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह भी कराया गया था, जिसमें 62% ‘हां’ वोट मिले। यह चार्टर संसद को 180 दिनों के लिए संविधान सभा बनाने का अधिकार देता है, ताकि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं में बदलाव किए जा सकें। बीएनपी ने चार्टर पर हस्ताक्षर तो किए, लेकिन कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई और दावा किया कि उसे ड्राफ्टिंग में शामिल नहीं किया गया। आज बीएनपी सांसदों ने सांसद के रूप में शपथ ली, लेकिन संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेने से इनकार कर दिया है। जमात-ए-इस्लामी के डिप्टी चीफ सैयद अब्दुल्लाह मुहम्मद ताहेर ने कहा कि अगर बीएनपी सांसद सुधार परिषद की शपथ नहीं लेंगे तो जमात के सांसद कोई शपथ नहीं लेंगे। एनसीपी की संयोजक मोनिरा शर्मिन और सांसद अब्दुल्लाह अल अमीन ने भी यही रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बीएनपी की इस कार्रवाई से वे शपथ लेने पर विचार कर रहे हैं। जमात महासचिव मिया गोलाम परवर और एनसीपी के नसीरुद्दीन पटवारी ने चुनाव में धांधली, पोस्ट-पोल हिंसा और नोआखाली में एक महिला से कथित गैंगरेप का हवाला देते हुए बीएनपी को “फासीवादी” करार दिया और सड़क आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। यह विवाद शेख हसीना सरकार के खिलाफ 2024 के छात्र आंदोलन की याद दिला रहा है, जब “फासीवाद” का नारा खूब चला था।
अंतरराष्ट्रीय मेहमान और भारत की मौजूदगी
समारोह में कई पड़ोसी और अंतरराष्ट्रीय मेहमान पहुंचे हैं: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ढाका पहुंच चुके हैं। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल, नेपाल के विदेश मंत्री बाला नंदा शर्मा, मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील (राष्ट्रपति मुइज्जू भी आ सकते हैं), श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री नलिंदा जयतिस्सा और ब्रिटेन की इंडो-पैसिफिक अंडर सेक्रेटरी सीमा मल्होत्रा।
तारिक रहमान ने ढाका-17 सीट रखी और बोगरा-6 खाली की। अब 90 दिनों में बोगरा-6 और शेरपुर-3 पर उपचुनाव होंगे।अंतरिम सरकार के आखिरी दिन एनसीपी ने जुलाई चार्टर पर हस्ताक्षर किए, लेकिन शर्त जोड़ी कि जनमत संग्रह का पूरा कार्यान्वयन होना चाहिए। बीएनपी के पास दो-तिहाई बहुमत है और वह अर्थव्यवस्था स्थिर करने, महंगाई नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बहाल करने का वादा कर रही है। लेकिन जुलाई चार्टर पर यह विवाद नई सरकार के लिए पहली बड़ी चुनौती बन गया है। समारोह जारी है और शाम की शपथ पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

