जस्टिस विक्रम नाथ ने रिमार्क्ड , “आज हम प्रेमियों और नफरत करने वालों दोनों को सुनेंगे, हमारे पास पूरा समय है।”
सुनवाई की शुरुआत में कोर्ट ने पिछले निर्देशों की याद दिलाई, जिसमें 7 नवंबर 2025 को शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, खेल परिसरों आदि से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने, नसबंदी-टीकाकरण के बाद आश्रय गृहों में स्थानांतरित करने और उन्हें वापस मूल जगह पर न छोड़ने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं में “चौंकाने वाली वृद्धि” को प्रशासनिक विफलता करार दिया।
राजमार्गों पर मवेशियों की समस्या प्रमुख
बेंच ने राजमार्गों पर आवारा मवेशियों को जीवन के लिए गंभीर खतरा बताया। हाल के हादसों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि पिछले दो दिनों में राजस्थान में दो जजों की गाड़ियां मवेशियों से टकराईं, जिसमें एक जज को गंभीर रीढ़ की चोट आई है। कोर्ट ने एनएचएआई से पूछा कि संवेदनशील स्ट्रेच को क्यों बैरिकेडिंग या घेराबंदी नहीं की जा सकती। एनएचएआई ने बताया कि उसने करीब 1,400 वर्ग किलोमीटर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की है, जहां मवेशी अक्सर सड़क पर आ जाते हैं। हालांकि, कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग बाजारों-गांवों से गुजरते हैं, जिससे नियंत्रण मुश्किल होता है।
राज्यों की अनुपालन स्थिति निराशाजनक
एमिकस क्यूरी (वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल) ने कोर्ट को बताया कि केवल 10 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने ही अनुपालन हलफनामा दाखिल किया है। प्रमुख राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, कर्नाटक और तमिलनाडु ने अभी तक रिपोर्ट नहीं सौंपी है। राजस्थान और ओडिशा के हलफनामे देर से आए, जबकि असम और गुजरात के रात में। एमिकस ने कहा कि हलफनामों में आश्रय गृहों की संख्या, एनएचएआई-पशुपालन विभाग के बीच समन्वय और संवेदनशील राजमार्ग क्षेत्रों का डेटा नहीं है।
कुछ उपलब्ध डेटा:
• 2,691 आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर गौशालाओं में भेजा गया।
• महाराष्ट्र ने एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) केंद्रों की क्षमता और टेंडर की जानकारी दी, लेकिन व्यापक डेटा जुटाने में कठिनाई बताई।
• कुछ क्षेत्रों में 269 कुत्तों में से 98 हटाए गए।
एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) ने नवंबर 2025 में नसबंदी और आवारा पशुओं हटाने के लिए एसओपी जारी की है।
पृष्ठभूमि
यह मामला पिछले साल 28 जुलाई को स्वतः संज्ञान से शुरू हुआ, जब दिल्ली-एनसीआर में कुत्तों के काटने से रेबीज के कारण बच्चों की मौत की मीडिया रिपोर्ट्स आईं। कोर्ट ने पहले कई निर्देश दिए, लेकिन अनुपालन में कमी पर नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाओं की बाढ़ पर टिप्पणी की कि “इंसानों के मामलों में भी इतनी अर्जियां नहीं आतीं।”
वर्तमान में सुनवाई अनुपालन और सुरक्षा उपायों पर केंद्रित है। इलाकों में स्थिति पर निगरानी जारी है और कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने का आश्वासन दिया है।

