आज की सुनवाई के मुख्य बिंदु
• वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि हिरासत आदेश अवैध है क्योंकि वांगचुक को हिरासत के पूर्ण आधार उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे उन्हें अधिकारियों के समक्ष प्रभावी प्रतिवेदन करने का मौका नहीं मिला।
• सिब्बल ने जोर दिया कि NSA की धारा 8 और संविधान के अनुच्छेद 22(5) के तहत हिरासत के आधार समय पर उपलब्ध कराना अनिवार्य है। आधार न देने पर हिरासत आदेश स्वतः अवैध हो जाता है। उन्होंने इसके समर्थन में कई पुराने फैसलों का हवाला दिया।
• हिरासत आदेश में चार वीडियो (10, 11 और 24 सितंबर के) पर भरोसा किया गया था, लेकिन ये वीडियो वांगचुक को नहीं दिए गए। केवल पेन ड्राइव में दस्तावेज और स्क्रीनशॉट दिए गए।
• सिब्बल ने कोर्ट की अनुमति से 24 सितंबर का एक वीडियो चलाया, जिसमें वांगचुक भूख हड़ताल खत्म करते हुए लोगों से हिंसा रोकने की अपील कर रहे थे। सिब्बल ने कहा कि इस वीडियो का लहजा हिंसा भड़काने का नहीं, बल्कि उसे रोकने का था। इसे दबाया गया, जो हिरासत अधिकारी को गुमराह करने वाला है।
• सिब्बल ने यह भी बताया कि 25 सितंबर 2025 को दर्ज FIR के बाद कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई।
मामला क्या है?
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के दो दिन बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 घायल हुए थे। प्रशासन ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्हें लेह से जोधपुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया, जहां वे 100 दिन से ज्यादा समय से बंद हैं।
लद्दाख प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि हिरासत में सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया और वांगचुक की गतिविधियां सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा थीं।
आगे क्या?
आज बहस पूरी नहीं हो सकी। बेंच ने वीडियो देखा और सिब्बल से दलीलें पूरी करने को कहा, लेकिन समय के अभाव में सुनवाई 12 जनवरी तक टाल दी गई। फिलहाल वांगचुक जोधपुर जेल में ही रहेंगे। उनकी रिहाई की मांग लद्दाख के विभिन्न संगठनों और समर्थकों की ओर से लगातार उठ रही है।
यह मामला लद्दाख में राज्य का दर्जा और संवैधानिक संरक्षण की बड़ी मांग से जुड़ा हुआ है, जिस पर केंद्र सरकार के साथ बातचीत भी चल रही है।

