Supreme CourtFalse promises of marriage and sexual exploitation: सुप्रीम कोर्ट ने लंदन में रहने वाले एक एनआरआई आईटी प्रोफेशनल को मुंबई की एक वकील के साथ झूठे विवाह के वादे पर यौन शोषण के आरोप में अग्रिम जमानत दे दी है। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने 8 जनवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई थी।
कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ जारी लुक आउट नोटिस, ब्लू कॉर्नर नोटिस और उसे भगोड़ा घोषित करने की कार्यवाही को भी स्थगित रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और वह भारत लौटने पर जांच एजेंसी के सामने पेश होगा।
मामले की पृष्ठभूमि में शिकायतकर्ता मुंबई की प्रैक्टिसिंग वकील ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने तलाक के केस में कानूनी सलाह लेते समय उससे शारीरिक संबंध बनाए और विवाह का झूठा वादा किया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 69 (धोखे से यौन संबंध), 318(4) (धोखाधड़ी), 316(2) (विश्वासघात) और 3(5) (साझा इरादा) के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66ई (गोपनीयता उल्लंघन) के तहत केस दर्ज किया गया था।
आरोपी ने गिरफ्तारी की आशंका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत मांगी थी, जिसे 15 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। नवंबर 2025 में कोर्ट ने अंतरिम सुरक्षा देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी।
अपील स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 482 के तहत अग्रिम जमानत का हक है। कोर्ट ने गिरफ्तारी की स्थिति में 25,000 रुपये की नकद जमानत और दो जमानतदारों पर रिहाई का निर्देश दिया। साथ ही आरोपी को गवाहों को प्रभावित न करने, सबूतों से छेड़छाड़ न करने और जांच में पूरा सहयोग करने की चेतावनी दी।
कोर्ट ने आरोपी के लंदन में रहने को ध्यान में रखते हुए कहा कि अगर वह जांच या किसी अन्य कारण से भारत आएगा तो यह आदेश उसे सुरक्षा देगा। जांच की तारीखें उसे पहले से सूचित की जाएंगी ताकि वह यात्रा की व्यवस्था कर सके।
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि संबंध सहमति से थे, दोनों का विवाह का इरादा नहीं था और शिकायत प्रक्रिया का दुरुपयोग है। राज्य और शिकायतकर्ता की ओर से गंभीर आरोपों का हवाला देकर हिरासत में पूछताछ की जरूरत बताई गई है।
फिलहाल इस फैसले पर कोई नई प्रतिक्रिया या आगे की कानूनी कार्यवाही की खबर नहीं आई है। मामला झूठे विवाह वादे से जुड़े यौन शोषण केसों में अग्रिम जमानत के मानकों पर चर्चा को फिर से गरमा बना सकता है।

