नया नियम क्यों?
अधिकारी बताते हैं कि पहले नियमों का पालन नहीं हो रहा था और दुकानदार पुराने अंडे को “ताजा” बताकर बेच रहे थे। अब हर अंडे पर साफ-साफ लिखा होगा कि मुर्गी ने कब अंडा दिया और कब तक सुरक्षित है। सामान्य तापमान (लगभग 30°C) पर अंडा 2 हफ्ते और 2-8°C कोल्ड स्टोरेज में 5 हफ्ते तक सुरक्षित रहता है।
होलसेलरों और उत्पादकों को किन दिक्कतों का सामना?
स्टांपिंग का खर्च और प्रक्रिया: हर अंडे पर स्टांप लगाने में 3-4 पैसे का खर्च आएगा। बड़े फार्म मशीनें लगा रहे हैं, लेकिन छोटे उत्पादक और होलसेलरों को मैनुअल स्टांपिंग का अतिरिक्त श्रम और समय लगेगा।
स्टोरेज की समस्या: पूरे प्रदेश में सिर्फ दो समर्पित अंडा कोल्ड स्टोरेज हैं (आगरा और झांसी)। अंडों को सब्जियों के साथ स्टोर नहीं किया जा सकता। बाहर के राज्यों से आने वाले अंडों की सख्त जांच होगी।
सप्लाई चेन प्रभाव: अनुपालन में देरी से थोक विक्रेताओं को स्टॉक रोटेट करने में दिक्कत हो सकती है। पुराने नियमों (2023 के स्टोरेज नियम) में भी व्यापारियों ने कीमत बढ़ने और सप्लाई प्रभावित होने की शिकायत की थी। अतिरिक्त मुख्य सचिव (पशुपालन) मुकेश मेश्राम ने कहा, “स्टांपिंग का खर्च सिर्फ 3-4 पैसे है, इसलिए कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। कई फार्म पहले से तैयारी कर चुके हैं।”
होलसेलरों और व्यापारियों की राय
होलसेलर और पोल्ट्री फार्मर अभी इस नियम की तैयारी में जुटे हैं। कुछ थोक विक्रेताओं का कहना है कि “छोटे स्तर पर अतिरिक्त खर्च और समय लगेगा, लेकिन अगर सरकार कोल्ड स्टोरेज बढ़ाए तो समस्या कम होगी।” पुराने अनुभव से वे चिंतित हैं कि शुरुआती दिनों में सप्लाई प्रभावित हो सकती है और छोटे व्यापारियों पर बोझ पड़ेगा। हालांकि, बड़े उत्पादक इसे स्वागत योग्य बता रहे हैं क्योंकि इससे बाजार में पारदर्शिता आएगी।
ग्राहकों की राय
सामान्य उपभोक्ता इस नियम को सकारात्मक मान रहे हैं। बाजार में खरीदारी करने वाले कई लोग कह रहे हैं, “अब दुकानदार पुराना अंडा ताजा बताकर नहीं बेच पाएंगे। एक्सपायरी डेट देखकर हम सुरक्षित खरीद सकेंगे।” कुछ ग्राहक चिंता जता रहे हैं कि अगर लागू करने में कोई खामी हुई तो कीमत बढ़ सकती है, लेकिन ज्यादातर का एक ही मत है- “सेहत के लिए थोड़ा खर्च ठीक है, लेकिन सरकार सुनिश्चित करे कि आम आदमी पर बोझ न पड़े।”
FSDA और पशुपालन विभाग नियमित जांच करेंगे। बाहर से आने वाले अंडों पर भी सख्ती बरती जाएगी। यह नियम उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन लागू करने में बुनियादी ढांचे (कोल्ड स्टोरेज) की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब देखना होगा कि 1 अप्रैल के बाद बाजार में कितनी आसानी से यह नियम लागू होता है और अंडे की कीमत-गुणवत्ता पर इसका क्या असर पड़ता है।

