गुर्जर समाज को साधने की बड़ी रणनीति
यह रैली विशेष रूप से गुर्जर समाज को जोड़ने के मकसद से आयोजित की जा रही है। सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति के तहत गुर्जर समाज को मजबूती से अपने पक्ष में करने का प्रयास तेज हो गया है। पहले जाति आधारित सम्मेलनों पर रोक के बाद इन्हें पीडीए भाईचारा रैली का नाम दिया गया है। रैली के संयोजक एवं सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने कहा कि सरकार उनके आयोजनों से घबरा गई थी, इसलिए जाति नाम से कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाई गई थी। अब पीडीए के बैनर तले सभी समाजों को जोड़ा जा रहा है।
सफीपुर बैठक में जुटे 30 जिलों के गुर्जर नेता
रैली की तैयारियों को गति देने के लिए रविवार (11 जनवरी) को ग्रेटर नोएडा के सफीपुर गांव में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इसमें 30 जिलों के करीब 135 विधानसभा क्षेत्रों से गुर्जर समाज के प्रमुख नेता शामिल हुए। मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़, आगरा, मथुरा, अमरोहा, बदायूं सहित कई जिलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में गुर्जर समाज की व्यापक भागीदारी से सपा के कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया।
अब तक 50 से अधिक पीडीए चौपालें आयोजित
सपा नेता राजकुमार भाटी ने बताया कि अगस्त 2025 से गुर्जर समाज में राजनीतिक जागरूकता अभियान चल रहा है। इस दौरान 20 जिलों के लगभग 50 विधानसभा क्षेत्रों में पीडीए चौपालों का सफल आयोजन हो चुका है। दादरी की प्रस्तावित रैली इस अभियान की सबसे बड़ी कड़ी होगी, जिसमें सर्वसमाज के लोग शामिल होंगे।
भाजपा भी सतर्क, अपनी रणनीति बनाने में जुटी
गुर्जर समाज की इस व्यापक गोलबंदी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी सतर्क हो गई है। पार्टी अपनी काउंटर रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर वोटों का समीकरण 2027 के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
सपा की यह पहल सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कई नेता और कार्यकर्ता रैली की तैयारियों की तस्वीरें और वीडियो साझा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में अभियान को और तेज करने की योजना है।

