
जान नायकन: सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई, रिलीज पर संशय बरकरार
विजय की राजनीतिक पारी की आखिरी फिल्म जान नायकन सेंसर बोर्ड के विवाद में फंसकर रिलीज नहीं हो पा रही। CBFC ने धार्मिक भावनाएं आहत करने वाले कंटेंट का हवाला दिया। मद्रास हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के U/A सर्टिफिकेट देने के ऑर्डर पर स्टे लगा दिया। प्रोड्यूसर्स ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां मामले की सुनवाई 15 या 19 जनवरी को हो सकती है। विजय की पार्टी TVK ने पहली बार बयान जारी कर शांतिपूर्ण रिलीज की मांग की। अगर चुनाव आयोग मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू करता है, तो 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव तक रिलीज रुक सकती है।
पराशक्ति: कांग्रेस की बैन मांग तेज, डायरेक्टर ने दी सफाई
सिवाकार्थिकेयन स्टारर पराशक्ति रिलीज के बाद विवादों में घिर गई। फिल्म 1965 की एंटी-हिंदी आंदोलन की पृष्ठभूमि पर बनी है। तमिलनाडु यूथ कांग्रेस ने इसे इंदिरा गांधी को बदनाम करने और इतिहास विकृत करने का आरोप लगाते हुए बैन की मांग की। कांग्रेस नेता अरुण भास्कर और एमएस लक्ष्मणन ने कहा कि फिल्म में काल्पनिक सीन हैं, जैसे इंदिरा गांधी के सामने ट्रेन जलाना। डायरेक्टर सुधा कोंगारा ने जवाब दिया कि यह जानबूझकर किया गया हमला है और फिल्म में डिस्क्लेमर है। DMK ने फिल्म को “ऐतिहासिक श्रद्धांजलि” बताया, जबकि कुछ विजय फैंस पर पोस्टर फाड़ने के आरोप लगे। CBFC ने पहले 23 कट्स मांगे थे।
टॉक्सिक: टीजर पर अश्लीलता के आरोप, महिला आयोग ने CBFC को लिखा पत्र
यश की टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन अप्स का टीजर 8 जनवरी को रिलीज हुआ, लेकिन AAP की महिला इकाई और सोशल एक्टिविस्ट दिनेश कल्लाहल्ली ने अश्लील कंटेंट का आरोप लगाकर शिकायत की। कर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर विमेन (KSCW) ने CBFC से टीजर हटाने और जांच की मांग की। शिकायत में कहा गया कि सीन महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं और बच्चों तक पहुंच रहे हैं। डायरेक्टर गीतू मोहनदास ने महिला सुख पर बात कर अपना बचाव किया, लेकिन विवाद थम नहीं रहा।
ये तीनों विवाद दक्षिण भारत में सिनेमा की राजनीतिक और सामाजिक भूमिका को रेखांकित कर रहे हैं। चुनाव नजदीक आने से फिल्में विचारधाराओं की लड़ाई का मैदान बन रही हैं। आगे क्या होता है, यह देखना बाकी है।

