Social media tightening for children: फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र वालों पर बैन को मंजूरी दी, भारत में गोवा-आंध्र प्रदेश कर रहे विचार

Social media tightening for children: दुनिया भर में बच्चों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित कर दिया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 साल से कम उम्र वालों पर बैन लागू कर चुका है। भारत में भी गोवा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य ऑस्ट्रेलिया मॉडल की तर्ज पर बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

फ्रांस में ऐतिहासिक फैसला
फ्रांस की नेशनल असेंबली ने सोमवार देर रात 130-21 के भारी मतों से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचैट) पर बैन लगाने वाले विधेय, जिसमें हाई स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी रोक शामिल है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे तेजी से लागू करने का अनुरोध किया है। विधेयक अब सीनेट में जाएगा और सितंबर 2026 से नए शैक्षणिक सत्र में लागू हो सकता है।

मैक्रों ने कहा, “हमारे बच्चों का दिमाग बिकने के लिए नहीं है। न अमेरिकी प्लेटफॉर्म को, न चीनी नेटवर्क को। उनके सपनों को एल्गोरिदम द्वारा निर्देशित नहीं किया जाना चाहिए।” कुछ वामपंथी आलोचकों ने इसे स्वतंत्रता का हनन बताया, लेकिन विधेयक को व्यापक समर्थन मिला है।

ऑस्ट्रेलिया: दुनिया का पहला देश
ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या इस्तेमाल करने पर बैन लागू कर दिया। प्लेटफॉर्म्स को अब उम्र सत्यापन के लिए उचित कदम उठाने होंगे, वरना भारी जुर्माना लग सकता है। इसका मकसद साइबरबुलिंग, व्यसन और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से बच्चों को बचाना है।

भारत में बढ़ती मांग: गोवा और आंध्र प्रदेश आगे
भारत में अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कोई कानून नहीं है, लेकिन राज्य स्तर पर पहल तेज हो रही है। गोवा सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है। आईटी मंत्री रोहन खाउंटे ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के कानून का अध्ययन किया जा रहा है और अभिभावकों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। गोवा पर्यटन राज्य होने के बावजूद बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

आंध्र प्रदेश में भी मंत्रियों के समूह (GoM) ने हाल ही में इस मुद्दे पर चर्चा की। राज्य सरकार ऑस्ट्रेलिया मॉडल का अध्ययन कर रही है और जल्द फैसला ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक, बैन के पक्ष में बेहतर एकाग्रता, शारीरिक संपर्क और ‘डिजिटल क्लिफ’ (16 साल में अचानक एक्सपोजर के नुकसान) जैसे तर्क दिए जा रहे हैं।

इससे पहले मद्रास High Court ने भी केंद्र को 16 साल से कम उम्र वालों पर बैन लगाने का सुझाव दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों में चिंता, अवसाद और साइबरबुलिंग बढ़ा रहा है।

विश्व स्तर पर यह ट्रेंड बढ़ रहा है, जहां अभिभावक और सरकारें बच्चों को व्यसनकारी एल्गोरिदम से बचाने के लिए सख्त कदम उठा रही हैं। भारत में अगर गोवा या आंध्र प्रदेश बैन लागू करते हैं, तो अन्य राज्य भी इसका अनुसरण कर सकते हैं। फिलहाल जांच और चर्चाएं जारी हैं।

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