नोएडा के कई सेक्टरों में विद्युत निगम द्वारा लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर में तकनीकी खराबी आने से हजारों उपभोक्ताओं के घर घंटों बिजली बाधित रही। सेक्टर 105 पॉकेट ए में शनिवार दोपहर गई बिजली देर शाम तक नहीं आई। स्मार्ट मीटर में बिजली आ रही थी, लेकिन उसका पावर न होने से सारे विद्युत चलित उपकरण बंद पड़े रहे। इस गड़बड़ी के चलते गंभीर मरीजों की ऑक्सीजन सप्लाई तक बाधित रही। कुल मिलाकर कहा जाए तो विद्युत विभाग की स्मार्ट मीटर व्यवस्था फेल हो गई है।
होली से पहले 77 हजार घरों में छाया अंधेरा, उपभोक्ताओं में भारी रोष
उत्तर प्रदेश में होली के त्योहार से ठीक पहले बिजली विभाग की कार्रवाई ने हजारों परिवारों को अंधेरे में धकेल दिया। प्रदेश के लगभग 76,785 स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए गए, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। वहीं, उपभोक्ता परिषद ने यह भी याद दिलाया कि जन्माष्टमी के दौरान भी ऐसी ही दिक्कतें आई थीं, जिसके बाद इस योजना को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था।
रिचार्ज के बाद भी नहीं आई बिजली, सिस्टम फेल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि कई उपभोक्ताओं का बैलेंस पॉजिटिव होने के बावजूद उनकी बिजली काट दी गई। नोएडा और गाजियाबाद में कई लोगों ने शिकायत की कि मीटर रिचार्ज करने के बाद भी बैलेंस अपडेट नहीं हुआ और खाते में राशि माइनस ही दिखाई गई।
23 लाख उपभोक्ताओं का बिजली बिल 31 प्रतिशत बढ़ा, स्मार्ट मीटर पर उठे सवाल
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की एक ताजा रिपोर्ट ने बिजली विभाग के दावों की पोल खोल दी है। जिन 23 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, उनके बिजली बिल में सालाना औसतन 31.19 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। तिमाही वार आंकड़े और भी चैंकाने वाले हैं। अप्रैल से जून में बिल में 32.80 प्रतिशत, जुलाई से सितंबर में 22.78 प्रतिशत और अक्टूबर से दिसंबर में सबसे अधिक 36.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्मार्ट मीटर की वजह से इन उपभोक्ताओं को एक साल में 66 करोड़ रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़े।
14 जिलों में प्रीपेड मोड लागू, ग्रामीण उपभोक्ता सबसे ज्यादा परेशान
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाले 14 जिलोंः मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, रामपुर और बिजनौर में स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में बदला जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या या ऑनलाइन पेमेंट के साधन न होने की वजह से प्रीपेड मीटर का रिचार्ज खत्म होने पर लोगों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है।
हर महीने ₹100 अतिरिक्त शुल्क का बोझ-गरीबों पर सबसे बड़ा असर
बिजली कंपनियां स्मार्ट मीटर की लागत की भरपाई के लिए मीटर रेंट को मासिक बिलिंग टैरिफ में जोड़ने की योजना बना रही हैं। एक गरीब परिवार जो महीने का 300 से 400 रुपये का बिजली बिल मुश्किल से भर पाता है, उसके लिए 100 रुपये का अतिरिक्त मीटर शुल्क 25 से 30 प्रतिशत की सीधी वृद्धि होगी।
27,342 करोड़ का विवादित टेंडर-भ्रष्टाचार के आरोप
केंद्र सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना के लिए ₹18,885 करोड़ मंजूर किए थे, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन ने ₹27,342 करोड़ का टेंडर जारी किया। यह मामला अब विनियामक आयोग तक पहुंच चुका है और बड़ी कानूनी लड़ाई की तैयारी है।
किसान और बिजली कर्मचारी एकजुट-जबरन मीटर लगाने का विरोध
बिजली के निजीकरण और उपभोक्ताओं के घरों पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की जबरदस्ती को लेकर किसानों और बिजली कर्मचारियों ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के बीच समझौते के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गए।
मीटर की कीमत में कटौती-लेकिन पुराने उपभोक्ताओं का पैसा फंसा
पहले सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए 6,016 रुपये वसूले जा रहे थे, लेकिन अब इसकी कीमत घटाकर सिर्फ 2,800 रुपये कर दी गई है। जिन उपभोक्ताओं ने 6,016 रुपये जमा किए हैं, उनकी वापसी के लिए विकल्प देने पर विचार किया जा रहा है।
उपभोक्ता परिषद की मांग-उच्च स्तरीय जांच हो
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मांग रखी है कि स्मार्ट मीटर योजना का पूरा खर्च बिजली कंपनियों या सरकार को वहन करना चाहिए और इसे किसी भी रूप में टैरिफ बढ़ाकर उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा जाना चाहिए। उपभोक्ता परिषद ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
कुल मिलाकर कहा जाए तो यूपी में स्मार्ट मीटर की यह डिजिटल क्रांति अब जनता के लिए डिजिटल आफत बन चुकी है। तकनीकी खामियां, फर्जी रिचार्ज, बढ़े हुए बिल और टेंडर घोटाले कृ इन सब मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना होगा, वरना लाखों घरों में बिजली का संकट और गहरा होता जाएगा।

