Ghaziabad news स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने के बाद शहर के उपभोक्ताओं को नए नियम और प्रीपेड व्यवस्था समझने में काफी दिक्कत हो रही है। पोस्टपेड से प्रीपेड व्यवस्था में बदलाव के बाद कई उपभोक्ताओं का कनेक्शन बैलेंस नेगेटिव होते ही कट जाता है, जबकि उन्हें इस बारे में कोई अग्रिम जानकारी नहीं दी जाती।
सिस्टम के अनुसार नेगेटिव बैलेंस को पॉजिटिव करने के लिए दोगुना रिचार्ज करना पड़ता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इससे पहले वे पूरे महीने बिजली इस्तेमाल के बाद भुगतान करते थे, लेकिन अब पुराने बकाया और अग्रिम बैलेंस को मिलाकर अधिक रिचार्ज करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, दो हजार रुपये नेगेटिव बैलेंस होने पर चार हजार रुपये तक रिचार्ज करना पड़ता है।
उपभोक्ताओं नेआरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने के समय न तो कोई डेमो दिया गया और न ही लिखित सूचना प्रदान की गई। बिजली विभाग द्वारा मोहल्ला स्तर पर जागरूकता अभियान, पम्पलेट या कैंप नहीं चलाए जाने से लोग सीधे संकट में पड़ गए।
रिचार्ज के बावजूद विद्युत आपूर्ति ठप
कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि नेगेटिव बैलेंस चुकाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई। यूपीपीसीएल कंज्यूमर ऐप से रिचार्ज करने पर भी घंटों तक भुगतान आरएमएस पोर्टल पर अपडेट नहीं होता। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह सर्वर में खराबी के कारण हो रहा है।
स्मार्ट/प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता नहीं
बिजली दर (टैरिफ) आदेश में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट/प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता विद्युत अधिनियम 2003 में कहीं भी नहीं है, और उपभोक्ता के अधिकार सर्वोच्च हैं। और विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत, उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का कानूनी अधिकार है। उपभोक्ता के पास प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का पूर्ण अधिकार है, इसे थोपा नहीं जा सकता
क्या कहते हैं मुख्य अभियंता जोन प्रथम
मुख्य अभियंता जोन-प्रथम पवन अग्रवाल ने बताया कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था नई है, इसलिए प्रारंभिक समस्याएं आ रही हैं।
उन्होंने उपभोक्ताओं से अनुरोध किया कि जिनके घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगे हैं, वे लगभग एक महीने के बिजली बल के बराबर रिचार्ज कर लें, ताकि स्वचलित विद्युत विच्छेदन से बचा जा सकें।\
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