‘Sharma Ji Ka Beta’ Says Goodbye to Engineering: भारतीय युवा पारंपरिक करियर पथ से हटकर लचीलापन, स्किल्स और मल्टीपल इनकम सोर्स की ओर बढ़ रहे हैं। 2025 की प्रमुख रिपोर्ट्स में यह बदलाव साफ दिख रहा है, जो शिक्षा और नौकरी बाजार को नई दिशा दे सकता है।
नई दिल्ली: दशकों से भारतीय माता-पिता के लिए इंजीनियरिंग सुरक्षित और सम्मानजनक करियर का प्रतीक रही है। लेकिन अब जेन ज़ेड (1997-2012 के बीच जन्मे युवा) इस पारंपरिक रास्ते से दूर हो रहा है। ताजा सर्वे और रिपोर्ट्स बताते हैं कि युवा अब स्किल-बेस्ड करियर, साइड हसल, फ्रीलांसिंग और ऑन-द-जॉब लर्निंग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
डेटा में दिख रहा बदलाव
रैंडस्टैड इंडिया की ‘द जेन ज़ेड वर्कप्लेस ब्लूप्रिंट 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 16% जेन ज़ेड युवा पारंपरिक सिंगल फुल-टाइम जॉब चाहते हैं। वहीं 43% फुल-टाइम जॉब के साथ साइड हसल पसंद कर रहे हैं। एंट्री-लेवल जॉब्स में 29% की गिरावट आई है, जिससे युवा खुद करियर बनाने पर फोकस कर रहे हैं।
डेलॉइट ग्लोबल जेन ज़ेड एंड मिलेनियल सर्वे 2025 में भारत के 809 प्रतिभागियों से पता चला कि 94% जेन ज़ेड युवा ऑन-द-जॉब स्किल्स सीखने को करियर ग्रोथ का मुख्य स्रोत मानते हैं। कई युवा उद्देश्यपूर्ण काम और वर्क-लाइफ बैलेंस को सैलरी जितना ही महत्व दे रहे हैं।
अनस्टॉप की स्किल्स एंड एआई इन हायरिंग रिपोर्ट्स से भी यही ट्रेंड उभरा है। 78% जेन ज़ेड मानते हैं कि डिग्री उन्हें जॉब-रेडी स्किल्स नहीं देती। 93% एचआर लीडर्स भी डिग्री को पुराना मान रहे हैं।
2026 की शुरुआत में टेक हायरिंग 24% गिरी है, जो इंजीनियरिंग ग्रैजुएट्स के लिए चुनौती है। कई रिपोर्ट्स में 2024 बैच के 83% इंजीनियरिंग ग्रैजुएट्स अभी बेरोजगार हैं।
युवाओं की आवाज़
मुंबई की 22 साल की आन्या कहती हैं, “मैं ऐसी नौकरी नहीं चाहती जो मेरी पूरी ज़िंदगी खा जाए। मुझे क्रिएटिविटी, फ्लेक्सिबिलिटी और menaningful काम चाहिए।”
दिल्ली के 19 साल के रोहित बताते हैं, “मेरा कजिन AI बूटकैंप करके फ्रीलांस गिग्स ले रहा है, उसकी कमाई कई फ्रेश इंजीनियर्स से ज्यादा है। चार साल थ्योरी पर क्यों खराब करें?”
बेंगलुरु की नेहा (21) कहती हैं, “स्किल्स का पोर्टफोलियो बनाना बेहतर है, रैंक से ज्यादा लोग पैसे देते हैं प्रैक्टिकल काम के लिए।”
फ्रीलांसिंग और कंटेंट क्रिएशन जेन ज़ेड की पहली पसंद बन रहा है। कई युवा UGC क्रिएशन, ऑनलाइन ट्यूटरिंग और डिजिटल मार्केटिंग से अच्छी कमाई कर रहे हैं।
माता-पिता का नजरिया
यह बदलाव माता-पिता के लिए मुश्किल है। नोएडा की श्रीमती मेहता कहती हैं, “हमने ओवरटाइम करके बच्चे को अच्छे कोचिंग दिलवाई, ताकि इंजीनियर बने। अब फ्रीलांसिंग की बात करता है – यह अनिश्चित लगता है।”
पिछली पीढ़ी के लिए अच्छी डिग्री = स्थिर जॉब का फॉर्मूला था, लेकिन लेऑफ, ऑटोमेशन और बर्नआउट देखकर जेन ज़ेड अलग सोच रहा है।
बदलाव के कारण
1. AI और टेक बदलाव — 43% जेन ज़ेड ने AI की वजह से करियर प्लान बदले हैं।
2. स्किल्स की मांग — कंपनियां डिग्री से ज्यादा प्रैक्टिकल स्किल्स देख रही हैं।
3. फ्लेक्सिबिलिटी — हाइब्रिड वर्क, ऑटोनॉमी और मल्टीपल इनकम सोर्स आकर्षक हैं।
4. बूटकैंप्स का बूम — 83% जेन ज़ेड खुद अपस्किलिंग कर रहे हैं।
भारत के भविष्य पर असर
600 मिलियन से ज्यादा जेन ज़ेड आबादी वाले भारत में यह बदलाव बड़ा है। कॉलेजों को करिकुलम अपडेट करना होगा, कंपनियों को रोल्स रीडिजाइन करने होंगे और परिवारों को सफलता की परिभाषा बदलनी होगी।
जेन ज़ेड मेहनत नहीं छोड़ रहा – बस इसे अपनी शर्तों पर कर रहा है।

