Reuters की रिपोर्ट्स के अनुसार, 40 से ज्यादा कंपनियां 50+ ब्रांडेड जेनेरिक वर्जन लॉन्च करने की तैयारी में हैं। प्रमुख कंपनियां जैसे Sun Pharma, Dr Reddy’s, Zydus Lifesciences, Lupin, Mankind Pharma, Cipla, Torrent, Alkem और अन्य “डे-वन” लॉन्च के लिए तैयार हैं। कुछ कंपनियां पहले से ही को-मार्केटिंग डील कर चुकी हैं, जैसे Zydus और Lupin।
कीमतों में भारी गिरावट:
वर्तमान में Ozempic की कीमत ₹8,800 से ₹11,000 प्रति माह और Wegovy की ₹10,000 से ₹16,400 प्रति माह है। जेनेरिक वर्जन की शुरुआती कीमत ₹3,000 से ₹5,000 प्रति माह (कुछ रिपोर्ट्स में ₹3,500-4,000) बताई जा रही है – यानी 50-70% तक सस्ता। समय के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर कीमतें और 90% तक गिर सकती हैं।
भारत में दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा टाइप-2 डायबिटीज और बढ़ती मोटापे की समस्या को देखते हुए यह बदलाव लाखों मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। GLP-1 दवाओं का बाजार 2030 तक 5 गुना बढ़ सकता है, और सेमाग्लूटाइड से ₹5,000 करोड़ से ज्यादा का अवसर अनुमानित है।
चिंताएं और सावधानियां:
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वजन घटाने के लिए “क्विक-फिक्स” के रूप में बिना मेडिकल सलाह के इस्तेमाल से गंभीर साइड इफेक्ट्स (पेट की समस्या से लेकर गंभीर जटिलताएं) हो सकते हैं। भारत के ड्रग कंट्रोलर ने GLP-1 दवाओं के विज्ञापन पर रोक लगाई है ताकि गलत प्रचार और अनुचित मांग न बढ़े। फार्माकोविजिलेंस सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है, क्योंकि उपयोग तेजी से बढ़ेगा।
नोवो नॉर्डिस्क की स्थिति: कंपनी ने कीमत युद्ध से इनकार किया है और गुणवत्ता व साइंस पर फोकस करने की बात कही है। वे पार्टनरशिप और डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ा रही हैं। यह घटना भारत को वैश्विक स्तर पर GLP-1 थेरेपी के केंद्र में ला रही है। आने वाले हफ्तों में बाजार में कितने ब्रांड लॉन्च होते हैं और असली कीमतें क्या रहती हैं – यह देखना दिलचस्प होगा। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

