भाजपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले संजय जोशी (Sanjay Joshi) का एक बार फिर से आरएसएस और पार्टी के अंदर कद बढ़ने लगा है। लंबे समय से संजय जोशी को साइडलाइन किया हुआ था मगर अब उनके समर्थक मजबूती से उनके साथ खड़े दिख रहे हैं। देश के अलग अलग शहरों में संजय जोशी के जन्मदिन पर भी होर्डिंग्स लगाए गए हैं और भाजपा नेता और कार्यकर्ता उनका जन्मदिन मनाने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। चर्चा होने लगी है कि भाजपा में जेपी नड्डा के बाद संजय जोशी की ताजपोशी अध्यक्ष के रूप में हो सकती है।
कौन है संजय जोशी
संजय जोशी एक भारतीय राजनीतिक नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्णकालिक प्रचारक हैं, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) में उनके संगठनात्मक योगदान के लिए जाना जाता है। उनका जन्म 6 अप्रैल 1962 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। पेशे से वे मैकेनिकल इंजीनियर हैं और शुरुआत में इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपना जीवन आरएसएस और बीजेपी को समर्पित कर दिया।
आरएसएस और बीजेपी में रही महत्पूर्ण भूमिका
संजय जोशी को 1988 में आरएसएस ने गुजरात बीजेपी में काम करने के लिए भेजा, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे 1988 से 1995 तक गुजरात बीजेपी के सचिव रहे और नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर काम किया, जो उस समय गुजरात बीजेपी के महासचिव थे। उनकी संगठनात्मक क्षमता के कारण उन्हें 2001 से 2005 तक बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बनाया गया, और इस दौरान उन्होंने कई राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मध्य प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने में मदद की।
बीजेपी से देना पड़ा था इस्तीफा
बता दें कि विवाद और राजनीतिक करियर में उतार-चढ़ाव रहते है। संजय जोशी 2005 में एक कथित सेक्स सीडी स्कैंडल के बाद उन्हें बीजेपी (BJP) से इस्तीफा देना पड़ा, जिसे बाद में फर्जी करार दिया गया, लेकिन इसके बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता पर असर पड़ा। इस घटना को नरेंद्र मोदी और उनके समर्थकों के साथ उनके मतभेदों से भी जोड़ा गया, क्योंकि दोनों के बीच गुजरात में सत्ता और संगठन को लेकर टकराव की खबरें थीं। 2012 में भी वे फिर से पार्टी से दूर हो गए, लेकिन संघ और कुछ बीजेपी नेताओं ने समय-समय पर उनकी वापसी की वकालत की।
वर्तमान स्थिति और चर्चा
हाल के वर्षों में संजय जोशी का नाम फिर से चर्चा में है, खासकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरएसएस उन्हें बीजेपी अध्यक्ष के रूप में देखना चाहता है, जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रभाव को चुनौती दे सकता है। हालांकि, ये केवल अटकलें हैं, और कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। वर्तमान में, वे राजनीतिक रूप से कम सक्रिय हैं, लेकिन संघ के भीतर और कुछ समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता बनी हुई है।
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