सफाई कर्मचारीयों का बवाल: सफाई कर्मचारी आंदोलन ने पकड़ा तूल, 6 यूनियन नेताओं पर FIR, 100 कर्मी बर्खास्त; सपा ने खोला मोर्चा

सफाई कर्मचारीयों का बवाल: नोएडा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल अब कानूनी और राजनीतिक संग्राम का रूप ले चुकी है। नोएडा प्राधिकरण ने सफाई कर्मचारियों को हड़ताल के लिए उकसाने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में यूनियन से जुड़े छह नेताओं के खिलाफ थाना फेज-1 में मुकदमा दर्ज कराया है। इस कार्रवाई के बाद सफाई कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिली और बड़ी संख्या में कर्मियों ने दलित प्रेरणा स्थल के बाहर प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

क्या है पूरा मामला?
प्राधिकरण में तैनात अवर अभियंता हरेंद्र सिंह मलिक की शिकायत पर दर्ज इस मुकदमे में यूनियन नेताओं, सतबीर मकवाना, साधु मकवाना, बबलू पारचा, रवि पारचा, राधे पारचा और सुनील टोंक पर आरोप है कि ये नेता बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारियों को साथ लाकर अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करते थे। शिकायत में यह भी कहा गया है कि व्हाट्सएप के जरिए भड़काऊ वॉइस नोट प्रसारित किए गए, जिसके बाद कई सफाई कर्मचारी काम छोड़कर हड़ताल पर चले गए। 11 मार्च को सेक्टर-8, 10, 11, 12 और 63 सहित आसपास के क्षेत्रों में कर्मचारियों को काम से रोका गया, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।

प्राधिकरण की कड़ी कार्रवाई
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहर की सफाई व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। जो कर्मचारी कार्य के प्रति गंभीर नहीं हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए, और यदि ठेकेदार कंपनियां व्यवस्था संभालने में असफल रहती हैं तो उन पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा। इस निर्देश के तहत 100 सफाई कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गई हैं और 15 ठेकेदार कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्राधिकरण की इस सख्ती के बाद ठेकेदार कंपनियों में हड़कंप की स्थिति बन गई और ठेकेदारों ने तत्काल करीब 150 नए कर्मचारियों को बाहर से बुलाकर शहर में सफाई कार्य शुरू करा दिया। प्रदर्शन के कारण शहर के विभिन्न सेक्टरों में कूड़े के ढेर लग गए, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया और आम नागरिक परेशान हैं।

वार्ता से इनकार
सफाई कर्मचारियों के नेताओं ने प्राधिकरण अधिकारियों से वार्ता की मांग की, लेकिन शीर्ष अधिकारियों और महाप्रबंधकों ने फिलहाल बातचीत से इनकार कर दिया। प्राधिकरण का साफ कहना है कि पहले सभी कर्मचारी बिना किसी शर्त के काम पर लौटें, उसके बाद ही उनकी समस्याओं पर विचार किया जाएगा।

सपा मैदान में, गिरफ्तारी पर आपत्ति

इस बीच समाजवादी पार्टी ने सफाई कर्मचारियों के पक्ष में आवाज उठाई है। नोएडा महानगर सपा अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने डीसीपी को पत्र लिखकर गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। पत्र में कहा गया है कि सफाई कर्मी दलित प्रेरणा स्थल और सेक्टर-6 प्राधिकरण कार्यालय पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे, लेकिन पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस लाइन भेज दिया। ‘नितिन पारचा’ (निवासी सोरखा) के लापता होने की विशेष चिंता जताते हुए सपा ने किसी अनहोनी की स्थिति में पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है। सपा प्रतिनिधिमंडल ने एसीपी-2 से मुलाकात कर गिरफ्तार सफाई कर्मियों की तत्काल रिहाई की मांग की, जिस पर एसीपी ने जल्द रिहाई का आश्वासन दिया है। सपा ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों को रिहा नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

 

पृष्ठभूमि
नोएडा प्राधिकरण में नए CEO कृष्णा करुणेश (2011 बैच IAS) ने पद संभालते ही सफाई व्यवस्था को वर्क सर्कल्स के अधीन करने का फैसला लिया, जिससे वरिष्ठता और तैनाती के विवाद खड़े हो गए। इसी बदलाव के विरोध में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल शुरू हुई थी। कर्मचारियों की मुख्य मांगें अतिरिक्त कार्यभार, उचित वेतन और पुरानी व्यवस्था की बहाली से जुड़ी हैं। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और यह मामला श्रमिक अधिकार, प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक हस्तक्षेप के त्रिकोण में फंसता जा रहा है।

 

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