Russian oil row: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जनवरी में रूसी तेल की कोई डिलीवरी नहीं होने की पुष्टि की, भारत की आयात में भारी गिरावट की संभावना

Russian oil row: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उसके जामनगर रिफाइनरी को पिछले तीन सप्ताह में रूसी कच्चे तेल का कोई कार्गो नहीं मिला है और जनवरी 2026 में भी कोई रूसी तेल की डिलीवरी की उम्मीद नहीं है। कंपनी का यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के जवाब में आया है, जिनमें दावा किया गया था कि रूसी तेल ले जा रहे टैंकर जामनगर की ओर बढ़ रहे हैं। रिलायंस ने इन दावों को “सरासर गलत” करार दिया है।

दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी परिसर जामनगर के संचालक रिलायंस ने कहा, “पिछले तीन सप्ताह में कोई रूसी तेल नहीं आया है और जनवरी में भी कोई शिपमेंट की उम्मीद नहीं है।” यह घोषणा नवंबर 2025 में कंपनी के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें उसने अपनी निर्यात-उन्मुख स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) इकाई के लिए रूसी तेल का आयात रोक दिया था।

भारत के रूसी तेल आयात पर असर
रिलायंस भारत की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी रिफाइनरी है और पहले रूसी तेल की प्रमुख खरीदार थी। विश्लेषकों के अनुसार, रिलायंस के इस कदम से जनवरी 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात तेजी से गिर सकता है—संभवतः 10 लाख बैरल प्रति दिन से नीचे, जो कई वर्षों का निचला स्तर होगा। दिसंबर 2025 में भारत ने रूसी तेल का आयात लगभग 11.4 लाख बैरल प्रति दिन रखा था, लेकिन अब यह आंकड़ा काफी कम होने की उम्मीद है।

भारत के दूसरे बड़े निजी रिफाइनर नायरा एनर्जी (जिसमें रूस की रोसनेफ्ट की बड़ी हिस्सेदारी है) पर भी यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल आयात पहले ही काफी कम हो चुका है।

ट्रंप का दबाव और व्यापार समझौता
यह विकास अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव की पृष्ठभूमि में आया है। अगस्त 2025 में ट्रंप ने रूसी तेल आयात करने के कारण भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था। 4 जनवरी 2026 को ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने हाल के महीनों में रूसी तेल आयात कम किया है ताकि “उन्हें खुश किया जाए” और अमेरिका के साथ व्यापार समझौता हासिल किया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आयात जारी रहा तो और शुल्क “जल्दी ही” लगाए जा सकते हैं।

ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जानते थे कि मैं नाखुश हूं… वे मुझे खुश करना चाहते हैं।” भारत सरकार अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की कोशिश कर रही है, जिसके लिए रूसी तेल आयात कम करना एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

पृष्ठभूमि
नवंबर 2025 में भारत ने रूसी तेल आयात बढ़ाकर 77 लाख टन कर दिया था, जो छह महीनों में सबसे ज्यादा था और कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 35.1% हो गई थी। लेकिन दिसंबर से आयात में गिरावट शुरू हो गई और जनवरी में यह और तेज होने की संभावना है।

रिलायंस का यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को बढ़ावा दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत का तेल आयात बिल बढ़ सकता है, क्योंकि रूसी तेल सस्ता था। आगे की स्थिति पर नजर रहेगी, खासकर अमेरिका-भारत व्यापार बातचीत के परिणाम पर।

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