ठगों ने खुद को TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के अधिकारी बताकर संपर्क किया और दावा किया कि पीड़ित के नाम पर जारी SIM कार्ड का गैरकानूनी इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने पीड़ित को मुंबई बुलाने की बात कही, लेकिन असमर्थता जताने पर वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट कर लिया। फर्जी कोर्ट रूम दिखाकर डराया और बैंक अकाउंट बेचने का आरोप लगाया, जिसमें कथित तौर पर 2 करोड़ के अवैध लेन-देन हुए थे।
6 फरवरी से 26 फरवरी तक चले इस ऑपरेशन में पीड़ित ने कई ट्रांसफर किए, जिसमें 13 फरवरी को करीब 51.95 लाख, 19 फरवरी को 48.95 लाख, 21 फरवरी को 10.95 लाख, 25 फरवरी को 17.20 लाख और अंत में छोटी राशि शामिल थी। ठगों ने फर्जी NOC (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) दिखाया, लेकिन पैसा वापस न मिलने पर पीड़ित को शक हुआ और उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस में FIR दर्ज कराई।
पुलिस ने बताया कि इस तरह के तीन बड़े मामले हाल ही में गौतम बुद्ध नगर में सामने आए हैं, जिनमें कुल 2.13 करोड़ की ठगी हुई है। सीनियर सिटीजन टारगेट हो रहे हैं। साइबर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
यह घटना डिजिटल अरेस्ट घोटालों की बढ़ती संख्या को दर्शाती है, जहां ठग लॉ एनफोर्समेंट अधिकारियों का रूप धरकर वीडियो कॉल पर फर्जी कोर्ट दिखाते हैं और लाखों-करोड़ों की उगाही करते हैं। हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बुजुर्गों से करोड़ों की ठगी हुई।
सुरक्षा के लिए सलाह:
• किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत पैसे ट्रांसफर न करें।
• दावों की आधिकारिक एजेंसी से सत्यापन करें।
• संदिग्ध कॉल आने पर पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर संपर्क करें।
अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और ठगों को जल्द पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

