सिमरन बाला राजौरी के सीमावर्ती शहर नौशेरा की रहने वाली हैं। वह अपने जिले की पहली महिला हैं, जो सीआरपीएफ में अधिकारी बनीं। नियंत्रण रेखा (LoC) के करीब बड़ा होने के कारण बचपन से ही अनुशासन और देशसेवा का माहौल उनके जीवन का हिस्सा बना रहा है। राजनीति विज्ञान में स्नातक सिमरन ने 2023 में पहली बार में ही यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 82 हासिल की। उस साल जम्मू-कश्मीर से क्वालीफाई करने वाली वह इकलौती महिला उम्मीदवार थीं।
अप्रैल 2025 में कमीशन प्राप्त करने के बाद उनकी पहली तैनाती छत्तीसगढ़ के बस्तरिया बटालियन में हुई, जहां नक्सल विरोधी अभियानों की जिम्मेदारी संभाली। गुरुग्राम स्थित सीआरपीएफ अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान उन्हें बेस्ट ऑफिसर और पब्लिक स्पीकिंग में अवॉर्ड मिला। गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल में उनकी आत्मविश्वास भरी कमान, ड्रिल की सटीकता और लीडरशिप ने वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित कर दिया, जिसके बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, पहले भी महिला अधिकारियों ने गणतंत्र दिवस परेड में टुकड़ियों का नेतृत्व किया है, लेकिन इतनी बड़ी पुरुष टुकड़ी की कमान पहली बार किसी महिला के हाथ में है। यह बदलते समय और मेरिट आधारित नेतृत्व का प्रतीक है। सिमरन की यह उपलब्धि जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।
परेड में सीआरपीएफ और एसएसबी की महिला डेयरडेविल्स की संयुक्त बाइक टीम भी स्टंट दिखाएगी। सिमरन बाला का मार्च कर्तव्य पथ पर न केवल अनुशासन की मिसाल पेश करेगा, बल्कि सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करेगा।

