नोएडा में 22% की बढ़ोतरी
नोएडा में होली से ठीक पहले (1-3 मार्च) तीन दिनों में 7.7 लाख लीटर शराब बिकी, जिसकी कीमत ₹32 करोड़ रही। जिला एक्साइज अधिकारी सुबोध कुमार ने बताया कि पिछले साल इसी अवधि में ₹27 करोड़ की बिक्री हुई थी – यानी इस बार 22.2% की बढ़ोतरी। 3 मार्च को अकेले ₹13 करोड़ की सेल्स दर्ज की गई, जबकि रोजाना औसत ₹4-5 करोड़ रहता है। कंट्री मेड लिकर सबसे ज्यादा बिका (3 लाख लीटर), उसके बाद बीयर (2.7 लाख लीटर) और IMFL (1.9 लाख लीटर)। भांग की बिक्री भी थोड़ी बढ़कर ₹2 लाख पहुंची।
गाजियाबाद दिल्ली में भी रिकॉर्ड
गाजियाबाद और दिल्ली एनसीआर के अन्य इलाकों में होली के आसपास ₹20 करोड़ से ज्यादा की शराब और बीयर बिकी। दिल्ली में 810 लिकर वेंड्स होली के दिन भी 10 बजे सुबह से 10 बजे रात तक खुले रहे। एक्साइज विभाग का कहना है कि पिछले सालों में ड्राई डे के कारण लोग गुरुग्राम, नोएडा या फरीदाबाद भागते थे और काला बाजार बढ़ जाता था। इस बार खुली दुकानों से असली शराब की बिक्री बढ़ी और राजस्व सरकार के पास रहा।
होली के बाद भी बिक्री का जोश बरकरार होली गुजरने के तीन दिन बाद (7 मार्च तक) भी दिल्ली-एनसीआर में शराब की मांग ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। त्योहार के बाद वाले वीकेंड और पार्टी सीजन के कारण दुकानों पर भीड़ जारी है। एक्साइज विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस एक बदलाव से दिल्ली को करोड़ों का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है, जो पहले पड़ोसी शहरों में चला जाता था।
सियासी विवाद भी छिड़ा दिल्ली सरकार के इस फैसले पर आप नेता मनीष सिसोदिया ने तंज कसा और इसे ‘असली शराब घोटाला’ बताया। वहीं एक्साइज विभाग का दावा है कि इससे अवैध शराब और नकली उत्पादों पर लगाम लगेगी। दिल्ली पुलिस ने भी होली के दौरान 134 चौराहों पर सख्त नाकाबंदी की थी और नशे में ड्राइविंग पर सख्ती बरती।
एक्साइज विभाग खुश, उपभोक्ता राहत पिछले सालों में ड्राई डे के कारण लोग स्टॉक कर लेते थे और बिक्री एक दिन पहले चरम पर पहुंच जाती थी। इस बार पूरे त्योहार में बिक्री फैलने से दुकानों पर भीड़ नियंत्रित रही और राजस्व में स्थिर बढ़ोतरी हुई। दिल्ली-एनसीआर के एक्साइज अधिकारी मान रहे हैं कि मार्च 2026 में कुल राजस्व लक्ष्य आसानी से पार हो जाएगा। होली के रंग में रंगे दिल्ली-एनसीआर के इस ‘लिकर बोनांजा’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि त्योहारों में शराब की डिमांड हमेशा रिकॉर्ड स्तर पर रहती है – बस इस बार नीति बदलने से फायदा सरकार को भी हुआ!

