Queue-breaking problem at Delhi’s Rajiv Chowk Hanuman Temple: राजीव चौक (कनॉट प्लेस) स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में मंगलवार और शनिवार को बजरंगबली के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगती हैं। घंटों इंतजार के बाद जब भक्त भगवान के दरबार में पहुंचने वाले होते हैं, तो अचानक कुछ लोग बगल से या ‘VIP लाइन’ का फायदा उठाकर आगे निकल जाते हैं। इससे सामान्य श्रद्धालुओं के मन में द्वेष और क्रोध उमड़ पड़ता है। कई बार यह विवाद धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुंच जाता है।
मंदिर के नियमित दर्शनार्थी रामेश्वर शर्मा कहते हैं, “हम सुबह से कतार में खड़े रहते हैं। कुछ लोग सिक्योरिटी या प्रभाव का इस्तेमाल करके साइड से घुस जाते हैं। आस्था का स्थान झगड़े का अखाड़ा क्यों बन रहा है?” ट्रिपएडवाइजर और सोशल मीडिया रिव्यूज में भी इस मंदिर की भीड़ और कतार-तोड़ी की शिकायतें बार-बार आती रहती हैं।
VIP कल्चर पर सख्ती से बोले उपराष्ट्रपति
इस समस्या पर देशव्यापी बहस तेज हो गई है। जनवरी 2025 में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने धार्मिक स्थलों पर VIP कल्चर को “अभिशाप” करार देते हुए कहा था, “भगवान के सामने सब बराबर हैं। VIP दर्शन दिव्यता के खिलाफ है। इसे पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।” सुप्रीम कोर्ट भी VIP और पेड दर्शन की प्रथा पर सुनवाई कर चुका है। मद्रास हाईकोर्ट ने 2022 में ही कहा था कि “लोग VIP कल्चर से तंग आ चुके हैं, खासकर मंदिरों में।”
क्या गिरजाघरों और मस्जिदों में भी ऐसा होता है?
इस सवाल का जवाब साफ है – नहीं।
मस्जिदों में: जुमे की नमाज के समय भारी भीड़ होती है, लेकिन इमाम और वॉलंटियर्स की देखरेख में सख्ती से ‘सफ’ (पंक्तियां) बनाई जाती हैं। किसी को कतार तोड़ने की कोशिश करने पर समुदाय खुद रोकता है। महिलाओं-पुरुषों के अलग सेक्शन और अनुशासन की मिसाल दी जाती है। लद्दू बंटवारे जैसी छोटी घटनाओं को छोड़कर कतार-तोड़ी या हाथापाई की खबरें लगभग नहीं मिलतीं।
गिरजाघरों (चर्च) में: संडे मास के दौरान यूशर्स (मार्गदर्शक), सीटिंग व्यवस्था और समयबद्ध सेवा होती है। कतार तोड़ने या धक्का-मुक्की की घटनाएं बहुत दुर्लभ हैं। सेवा सामूहिक होती है, न कि ‘जल्दी दर्शन’ की व्यक्तिगत होड़।
क्यों सिर्फ मंदिरों में यह समस्या?
धार्मिक विद्वानों और समाजशास्त्रियों के अनुसार मुख्य कारण हैं:
1. व्यक्तिगत दर्शन की भावना: हिंदू मंदिरों में भगवान की मूर्ति के साक्षात दर्शन और स्पर्श की तीव्र आस्था होती है, जिससे भक्त जल्दी पहुंचने की कोशिश करते हैं।
2. अत्यधिक भीड़: दिल्ली जैसे शहरों के लोकप्रिय मंदिरों (हनुमान मंदिर CP, वैष्णो देवी, तिरुपति आदि) में मंगलवार-शनिवार को लाखों भक्त आते हैं।
3. प्रबंधन की कमी: कई मंदिरों में स्वयंसेवकों की संख्या कम, पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर और VIP/दाताओं को विशेष सुविधा देने की परंपरा।
4. VIP संस्कृति: राजनीतिक नेता, अधिकारी और दानकर्ताओं को ‘स्पेशल एंट्री’ मिलती है, जो आम भक्तों को आहत करती है।
मंदिर समिति के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम बैरियर, सीसीटीवी और अतिरिक्त स्टाफ लगाते हैं, लेकिन कुछ लोग दबाव बनाते हैं। भक्तों से भी अपील है कि वे अनुशासन बनाए रखें।”
समाधान की मांग
बड़े मंदिरों (वैष्णो देवी, तिरुपति) के सफल मॉडल अपनाए जा सकते हैं – ऑनलाइन टोकन सिस्टम, सख्त सुरक्षा, जागरूकता अभियान। NDMC और मंदिर प्रशासन से श्रद्धालु अपील कर रहे हैं कि पीक डेज पर बेहतर भीड़ प्रबंधन किया जाए।
आस्था के केंद्रों को शांति, समानता और अनुशासन का प्रतीक बनाना सभी की जिम्मेदारी है। भगवान के दरबार में VIP नहीं, सिर्फ भक्त होना चाहिए।
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