Noida Authority News: नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग में वर्तमान में सिविल विंग के करीब 6 अधिकारी कार्यरत बताए जा रहे हैं। नियोजन से जुड़े जानकारों और कर्मचारियों का मानना है कि यदि इस विभाग में केवल नियोजन (टाउन प्लानिंग) से जुड़े विशेषज्ञ ही कार्य करें तो काम की गुणवत्ता और गति दोनों बेहतर हो सकती है। नियोजन विभाग का दायरा तकनीकी और दीर्घकालिक शहरी विकास से जुड़ा होता है, जिसमें विशेष प्रशिक्षण और अनुभव की आवश्यकता होती है। लेकिन जल और सिविल विभाग के अफसरों को नियोजन में तैनाती सवाल खड़े कर रही है। वैसे तो नियोजन विभाग में कुल चार अफसर है। जिसमें महाप्रबंधक मीना भार्गव, वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक और लेवल-1 शामिल है।
सीनियर मैनेजर देवेन्द्र निगम की भूमिका
प्राधिकरण के नियोजन विभाग में सीनियर मैनेजर के पद पर देवेन्द्र निगम की तैनाती है। सूत्रों के अनुसार, उनकी विशेषज्ञता और पूर्व अनुभव को देखते हुए उन्हें जल विभाग में जिम्मेदारी दी जानी अधिक उपयुक्त मानी जा रही है। शहर में आजकल गुणवत्तपूर्ण पानी की समस्या से हाहाकार मचा है। इंदौर का केस सबके सामने है, ऐसे में जल विभाग में काबिल अफसरों की जरूरत है। देवेन्द्र निगम को गंगा जल आपूर्ति का अनुभव लंबे समय से है। जल आपूर्ति, सीवर और ड्रेनेज जैसी योजनाओं में उनके अनुभव का बेहतर उपयोग हो सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि सही अधिकारी को सही विभाग में तैनात करने से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बन सकती है।
नियोजन विभाग का मुख्य कार्यक्षेत्र
नोएडा प्राधिकरण का नियोजन विभाग शहर के समग्र विकास की रीढ़ माना जाता है। इस विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में मास्टर प्लान तैयार करना, सेक्टरों का ले-आउट निर्धारण, भूमि उपयोग (लैंड यूज) तय करना, आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों की योजना बनाना शामिल है। इसके अलावा बिल्डिंग बायलॉज, एफएआर, ऊंचाई, हरित क्षेत्र और सड़कों की चैड़ाई से जुड़े मानकों का निर्धारण भी इसी विभाग के अंतर्गत आता है।
शहर के संतुलित विकास में नियोजन की अहम भूमिका
नियोजन विभाग भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्कूल, अस्पताल, पार्क, सामुदायिक केंद्र और परिवहन ढांचे की योजना बनाता है। बढ़ती आबादी, पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना इस विभाग की बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में यदि गैर-नियोजन पृष्ठभूमि के अधिकारी अधिक संख्या में इस विभाग में काम करें तो निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वैसे सिविल विभाग में प्रतिदिन सीईओ की और से कार्रवाई की जा रही है। यदि सिविल में काबिल लोग होगे तो अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण को रोका जा सकता है।
कार्य-कुशलता बढ़ाने के लिए पुनर्व्यवस्था की मांग
बता दें कि प्राधिकरण के भीतर भी यह मांग तेज हो रही है कि विभागों में तैनाती अधिकारियों की विशेषज्ञता के अनुरूप की जाए। नियोजन विभाग में टाउन प्लानर्स और संबंधित विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जाए, जबकि सिविल पृष्ठभूमि के अधिकारियों को निर्माण, जल या अन्य तकनीकी विभागों में जिम्मेदारी सौंपी जाए। इससे न केवल योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर होगा बल्कि नोएडा के सुव्यवस्थित और टिकाऊ विकास को भी मजबूती मिलेगी।
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