Questions about Operation Sindoor: भारतीय दूतावास ने ट्रंप के सहयोगी की फर्म से ट्रेड वार्ता, ऑपरेशन सिंदूर और द्विपक्षीय संबंधों को संभाला: फारा फाइलिंग से खुलासा

Questions about Operation Sindoor: अमेरिकी न्याय विभाग की विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (फारा) फाइलिंग के अनुसार, वाशिंगटन में भारतीय दूतावास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व प्रवक्ता जेसन मिलर की अगुवाई वाली लॉबी फर्म SHW LLC की सेवाएं लीं, ताकि भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता, ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाया जा सके। फाइलिंग में दावा किया गया है कि इस फर्म ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर और भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अमेरिकी अधिकारियों—जैसे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, युद्ध सचिव पीट हेगसेथ और सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ—के साथ मीटिंग्स तय कीं।

फाइलिंग के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर संघर्षविराम के दिन यानी 10 मई को दूतावास ने फर्म के जरिए व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के रिकी गिल से संपर्क किया था, ताकि संघर्ष की मीडिया कवरेज पर चर्चा की जा सके। हालांकि फाइलिंग में यह स्पष्ट नहीं है कि ये संपर्क संघर्षविराम से पहले हुए या बाद में, लेकिन यह उस दिन गहन संपर्क का संकेत देते हैं।

मोदी सरकार ने अब तक बार-बार इनकार किया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद चार दिन चले भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अमेरिका की कोई मध्यस्थता भूमिका थी। राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दावा किया था कि अमेरिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन विदेश मंत्रालय ने इसे खारिज किया है। विशेष रूप से ट्रंप के उस बयान को गलत बताया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने व्यापार रोकने की धमकी देकर संघर्ष रोका। ऐसे में 10 मई को व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर से संपर्क का उल्लेख महत्वपूर्ण है।

मीडिया द्वारा भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय से भेजे गए विस्तृत सवालों के जवाब में दूतावास ने फाइलिंग से इनकार नहीं किया, लेकिन कहा कि लॉबी फर्में हायर करना “मानक प्रथा” है और यह पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाता है। दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, “भारतीय दूतावास ने 1950 के दशक से लगातार सरकारों के दौरान स्थानीय प्रथा और आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसी फर्में हायर की हैं।” हालांकि विशिष्ट सवालों—जैसे अमेरिकी अधिकारियों से मीटिंग्स तय करने या 10 मई के संपर्कों—पर कोई जवाब नहीं दिया गया।

SHW LLC को 24 अप्रैल 2024 को अनुबंधित किया गया था। यह फर्म ट्रंप से निकट संबंध रखने वाले जेसन मिलर की है। फाइलिंग में दर्ज 60 गतिविधियों में से कई में ट्रेड वार्ताओं की स्थिति पर चर्चा के लिए अमेरिकी अधिकारियों से फोन कॉल्स का जिक्र है। अमेरिका द्वारा भारत पर 25% पारस्परिक और अतिरिक्त 25% दंडात्मक टैरिफ लगाने के बाद ये संपर्क बढ़े थे।

पूर्व और वर्तमान अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर ऐसी मीटिंग्स सीधे राजनयिक चैनलों से तय की जाती हैं। लॉबी फर्मों का इस्तेमाल सलाह और परिदृश्य समझने के लिए होता है, न कि सरकारी अधिकारियों से सीधे संपर्क के लिए। एक पूर्व राजनयिक ने कहा कि यह नया तरीका ट्रंप प्रशासन की नई शर्तों का संकेत हो सकता है।

SHW LLC को सालाना 1.8 मिलियन डॉलर (लगभग 15 करोड़ रुपये) का अनुबंध दिया गया, जिसमें से 9 लाख डॉलर का भुगतान हो चुका है। फर्म ने प्रधानमंत्री मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट्स को भी व्हाइट हाउस अधिकारियों तक “फ्लैग” किया, जिसके बाद ट्रंप और मोदी के बीच फोन वार्ताएं हुईं।

यह खुलासा भारत-अमेरिका संबंधों में नए प्रशासन के साथ संवाद के बदलते तरीकों को उजागर करता है, जबकि सरकार आधिकारिक तौर पर सीधे राजनयिक चैनलों पर जोर देती रही है।

यहां से शेयर करें