Public anger in Chandni Chowk: दिल्ली में 27 साल बाद सत्ता में लौटी भाजपा सरकार के एक साल पूरे होने पर चांदनी चौक की सड़कों पर जनता की राय साफ है, बुनियादी सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ, बल्कि कई मामलों में स्थिति और बिगड़ी है। “जय हिंद जनाब” की स्ट्रीट रिपोर्ट में स्थानीय लोगों ने सफाई, अस्पताल, ट्रैफिक, पार्किंग और यमुना सफाई को लेकर तीखी नाराजगी जताई। कुछ लोगों ने कहा कि काम “धीरे-धीरे” शुरू हो रहे हैं, लेकिन ज्यादातर ने “रीलें ज्यादा, जमीनी काम कम” की शिकायत भी की।
जनता की प्रमुख शिकायतें (स्ट्रीट सर्वे से)
सफाई की बदहाली:
एक स्थानीय निवासी (3 साल से रह रहे) ने बताया कि केजरीवाल सरकार में रात में भी सफाई होती थी और 80% साफ-सुथरा रहता था, अब सिर्फ 15-20%। गुरुद्वारे के लोग खुद झाड़ू लगाने को मजबूर। पत्थरों और सड़कों पर गंदगी जमा हो गई है।
अस्पतालों की स्थिति: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का रवैया खराब, दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। पिछली सरकार में बेहतर था।
ट्रैफिक और पार्किंग: लाल किले और चांदनी चौक में अवैध पार्किंग से जाम। ₹500 जुर्माने के बोर्ड लगे, लेकिन कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।
अवैध निर्माण: एक भाजपा कार्यकर्ता ने खुद माना कि बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहा है। शिकायत के बावजूद जेई-एई कुछ नहीं करते।
यमुना सफाई: “रीलें बनाई जाती हैं, लेकिन यमुना आज भी उतनी ही गंदी।” कुछ लोग संतुष्ट दिखे कि “काम शुरू तो हुआ है”, लेकिन बड़ा वर्ग बुनियादी समस्याओं से परेशान।
सरकारी दावा vs हकीकत
20 फरवरी को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक साल का रिपोर्ट कार्ड जारी किया—‘पहला कदम बदलाव का, एक साल विकास का’। उन्होंने दावा किया: “घोषणाओं से नतीजों की ओर, पोस्टर्स से परफॉर्मेंस की ओर।” स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रदूषण नियंत्रण में काम बताया।
लेकिन:
• चांदनी चौक पर: जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने ओवरसाइट कमिटी गठित करने के आदेश दिए—अवैध हॉकिंग, रिक्शा, पार्किंग, सफाई और अतिक्रमण के लिए। फरवरी 2026 में सीएम गुप्ता ने शाहजहानाबाद रिडेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (SRDC) की चेयरपर्सन की जिम्मेदारी खुद संभाली। ₹802 करोड़ की 241 सड़कों की मरम्मत योजना में शमनाथ मार्ग (चांदनी चौक) शामिल।
• यमुना: सरकार ने 12 नए STP (₹7200 करोड़), ड्रेन टैपिंग और 1600 हेक्टेयर फ्लडप्लेन रिस्टोरेशन का दावा किया। AAP ने “फेक क्लीनिंग” कहा।
• विपक्ष (AAP) ने रिपोर्ट कार्ड को “झूठा” बताया—महिलाओं को ₹2500 नहीं मिले, प्रदूषण बढ़ा, स्लम हाउसिंग तोड़ी गई। स्थानीय भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने पिछली AAP सरकार को दोष दिया, लेकिन ग्राउंड पर शिकायतें जारी है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शहर नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि चांदनी चौक जैसी हेरिटेज साइट पर एजेंसियों (MCD, PWD, पुलिस) के बीच समन्वय की कमी है। सफाई के लिए फंड और स्टाफ की कमी बताई जा रही है।जनता अब “रील्स नहीं, रिजल्ट्स” मांग रही है। एक साल पूरा होने पर सरकार ने वादा किया कि साल 2 में बड़े बदलाव दिखेंगे, लेकिन चांदनी चौक जैसे इलाकों में आम आदमी को अभी राहत नहीं मिल रही। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। कोई नया अपडेट आने पर तुरंत सूचित किया जाएगा।

