नेपाल में सियासी भूचाल: नेपाल की राजनीति में बड़ा हलचल मच गया है। शनिवार सुबह पूर्व प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली (केपी ओली) को भक्तपुर के गुंडु स्थित उनके आवास से नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी सूर्यविनायक, भक्तपुर से हिरासत में लिया गया। दोनों पर सितंबर 2025 में हुए जेन-जी (Gen-Z) प्रदर्शनों के दौरान लापरवाही और हिंसा के आरोप लगाए गए हैं, जिसमें 76 से 77 लोगों की मौत हुई थी।
यह गिरफ्तारी बालेन शाह (बलेंद्र शाह) के प्रधानमंत्री पद संभालने के महज 24 घंटे बाद हुई है। बालेन शाह ने शुक्रवार को शपथ ली थी और उनकी पहली कैबिनेट बैठक में ही गौरी बहादुर कार्की आयोग (Karki Commission) की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला लिया गया। आयोग ने प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों के इस्तेमाल में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए ओली और लेखक समेत कुछ अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी। नए गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। हमने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को नियंत्रण में ले लिया है। यह किसी से बदला नहीं, बल्कि न्याय की शुरुआत है।”
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया:
नई सरकार (राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व वाली) ने इस कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया और जवाबदेही का मामला बताया है। गृह मंत्री गुरुंग ने इसे “राजनीतिक बदला” नहीं, बल्कि “न्याय की शुरुआत” करार दिया। सरकार का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली हो, जवाबदेह होगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया:
सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) ने इस गिरफ्तारी को “राजनीतिक बदला” और “प्रतिशोधपूर्ण” बताया है। पार्टी ने ओली की तुरंत रिहाई की मांग की और आपातकालीन सचिवालय बैठक बुलाई। पार्टी के वरिष्ठ नेता राम बहादुर थापा ‘बादल’ की अध्यक्षता में हुई बैठक में कानूनी, राजनीतिक और सड़क आंदोलन चलाने का फैसला लिया गया। यूएमएल के उप महासचिव योगेश भट्टराई और पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने इसे “न्यायसंगत नहीं” बताया। ओली ने अपने वकीलों से कहा, “यह गिरफ्तारी प्रतिशोधपूर्ण है। मैं कानूनी लड़ाई लड़ूंगा, तैयार रहो।” कुछ यूएमएल कार्यकर्ता दावा कर रहे हैं कि ओली स्वेच्छा से सहयोग करने गए थे, न कि गिरफ्तार किए गए।
स्थानीय प्रतिक्रियाएं:
काठमांडू में ओली के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसे पुलिस ने हटा दिया। ओली के आवास पर भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। राजनीतिक हलकों में तनाव बढ़ गया है। यूएमएल ने पूरे देश में विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। कुछ नेता इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं:
घटना बहुत ताजा होने के कारण अभी तक कोई बड़े अंतरराष्ट्रीय बयान सामने नहीं आए हैं। भारतीय मीडिया ने घटना की व्यापक कवरेज की है, लेकिन आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। कुछ रिपोर्ट्स में चीन की चिंता का जिक्र है, क्योंकि ओली का चीन की ओर झुकाव रहा है। अमेरिका या अन्य देशों से अभी कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं आई है।
पृष्ठभूमि:
सितंबर 2025 (भाद्र 23-24) में भ्रष्टाचार विरोधी जेन-जी प्रदर्शनों में हिंसा भड़क गई थी। सुरक्षा बलों के कार्रवाई में दर्जनों युवा समेत 76-77 लोग मारे गए और अरबों का नुकसान हुआ। इन घटनाओं ने ओली सरकार को गिरा दिया और नए चुनाव हुए, जिसमें बालेन शाह की पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की।
ओली को गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य जांच के लिए त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल (TUTH) ले जाया गया। पुलिस ने उन्हें काठमांडू जिला पुलिस कार्यालय में रखा है। कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और दोनों पर 10 साल तक की सजा हो सकती है, अगर दोषी पाए गए। यह घटना नेपाल की राजनीति में नई शुरुआत का संकेत दे रही है, जहां पुरानी सत्ता पर जवाबदेही तय करने की कोशिश हो रही है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है। स्थिति पर नजर बनी हुई है।

