PMO’s address changed after 78 years: मकर संक्रांति पर पीएम मोदी नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट करेंगे, स्वतंत्रता के बाद पहली बार साउथ ब्लॉक से विदाई

PMO’s address changed after 78 years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह मकर संक्रांति (14 जनवरी) के अवसर पर अपने नए कार्यालय में शिफ्ट करने वाले हैं। यह नया कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स में स्थित है, जो सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से बाहर जा रहा है, जो 1947 से पीएमओ का पता रहा है।

सूत्रों के अनुसार, ‘सेवा तीर्थ-1’ में पीएमओ, ‘सेवा तीर्थ-2’ में कैबिनेट सेक्रेटेरिएट (जो पहले ही सितंबर 2025 में शिफ्ट हो चुका है) और ‘सेवा तीर्थ-3’ में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट (एनएससीएस) स्थानांतरित होगा। यह कॉम्प्लेक्स आधुनिक वर्कस्पेस, हाई-सिक्योरिटी फीचर्स और सेरेमोनियल रूम्स से लैस है, जो ‘सेवा’ की थीम पर आधारित है। पूरा एक्जीक्यूटिव एनक्लेव (सेवा तीर्थ) लार्सन एंड टूब्रो (L&T) द्वारा 1,189 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।

साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक खाली होने के बाद इन्हें ‘युगे युगेन भारत संग्रहालय’ में बदल दिया जाएगा। इसके लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ समझौता हुआ है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री का नया आधिकारिक निवास स्थान (एक्जीक्यूटिव एनक्लेव पार्ट-2) भी निर्माणाधीन है, जो 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है।

राजनेताओं के बयान और प्रतिक्रियाएं
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का हिस्सा है, जो औपनिवेशिक विरासत (colonial legacy) को पीछे छोड़ने पर जोर देता है। पहले राजपथ को कर्तव्य पथ नाम देने के बाद अब यह बदलाव आया है। सरकारी अधिकारियों ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन के स्थानों को ‘कर्तव्य’ और पारदर्शिता को प्रतिबिंबित करने के लिए नया रूप दिया गया है। सेवा तीर्थ नाम इसी भावना को दर्शाता है – सत्ता से सेवा की ओर।”

गृह मंत्री अमित शाह ने पहले सेवा तीर्थ नामकरण पर कहा था कि यह भारत की शासन व्यवस्था में सेवा और पारदर्शिता की नई पहचान है। भाजपा समर्थकों और विश्लेषकों ने इसे ‘नई भारत’ की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। सोशल मीडिया पर भाजपा नेता और समर्थक इसे आधुनिक, कुशल और सुरक्षित शासन का प्रतीक बता रहे हैं। एक प्रमुख पोस्ट में कहा गया, “औपनिवेशिक युग का अंत, भविष्योन्मुखी भारत की शुरुआत।”
विपक्ष की ओर से इस विशिष्ट शिफ्ट पर अभी कोई आधिकारिक ताजा बयान नहीं आया है, हालांकि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर पहले लागत और प्राथमिकताओं को लेकर आलोचना हुई थी।

यह बदलाव केंद्र सरकार के कार्यालयों को आधुनिक बनाने और दिल्ली में बिखरे मंत्रालयों को एक जगह लाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। कई मंत्रालय पहले ही नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट भवनों में शिफ्ट हो चुके हैं।

यह शिफ्ट न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि भारत की शासन व्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ेगा। क्या यह औपनिवेशिक अतीत से पूर्ण मुक्ति का प्रतीक बनेगा? यह तो आने वाला समय बताएगा।

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