‘Let LoP speak’ के नारे
विपक्ष के सांसदों ने जोर-ज़ोर से “Let the LoP speak” (Leader of Opposition को बोलने दो) के नारे लगाए गए। उनका आरोप है कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया, खासकर जब वे मुद्दों जैसे पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अनप्रकाशित आत्मकथा पर बयान देना चाहते थे।
विपक्ष का वॉक-आउट
जब शांतिपूर्ण नारेबाज़ी के बावजूद राज्य सभा की कार्यवाही में किसी समाधान या अनुमति की ओर कोई पहल नहीं हुई, तो विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉक-आउट कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को रोककर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाना गलत है।
मुख्य मुद्दा: नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अधिकार
विपक्ष कह रहा है कि लोकसभा में LoP राहुल गांधी को बोलने न देना – संविधान और प्रचलित संसदीय प्रक्रियाओं का उल्लंघन है। वे चाहते हैं कि Parliament दोनों सदनों में सुचारू रूप से कार्य करे और नेता प्रतिपक्ष को पूरा मौका मिले।
वहीं सरकार और सदन के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सभा में लोकसभा की कार्यवाही पर बहस नहीं हो सकती। यह नियम और रूल बुक के अनुरूप नहीं है।इसलिए Leader of Opposition को बोलने की अनुमति नहीं दी गई।
राजनीतिक बयानबाज़ियाँ
कांग्रेस के नेता जयराम रमेश ने चेतावनी दी कि अगर LoP को बोलने से रोका गया तो संसद का कामकाज ठप्प हो सकता है।विपक्ष का आरोप है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहती। सरकार की ओर से कहा गया कि प्रक्रिया कानून के अनुसार ही चल रही है और नियमों का पालन होना ज़रूरी है।
पृष्ठभूमि
इससे पहले लोकसभा की कार्यवाही में भी उपद्रव और नाराज़गी का माहौल बना, जिस कारण संसद को एक दिन के लिए स्थगित करना पड़ा था। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सभा भी सही मायने में चल नहीं पा रहा क्योंकि दोनों सदनों में LoP को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है।
निष्कर्ष
आज की घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि संसदीय परंपरा और नियमों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी टकराहट जारी है। विपक्ष का जोरदार कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया तभी मजबूत रहेगी जब नेता प्रतिपक्ष को खुले तौर पर बोलने की अनुमति मिले। वहीं सरकार का कहना है कि संसद के संचालन में नियमों का पालन करना ज़रूरी है।

