पाकिस्तान समर्थित ‘डेविल’ गिरोह का भंडाफोड़: उत्तर प्रदेश ATS ने एक बड़े पाकिस्तान-समर्थित आतंकी मॉड्यूल ‘डेविल गैंग’ का पर्दाफाश किया है। 2 अप्रैल को लखनऊ से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पूछताछ में खुलासा हुआ कि दुबई में छिपे मेरठ निवासी आकिब खान पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड हैं। गिरोह रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम को निशाना बनाने, गैस सिलिंडर वाले वाहनों में विस्फोटक लगाकर बड़े धमाके करने और दिल्ली-एनसीआर में लावारिस गाड़ियों में आगजनी की साजिश रच रहा था।
ATS की जांच में पता चला कि संदिग्ध पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में थे। वे छोटे-छोटे काम (रेकी, आगजनी के वीडियो भेजना) के बदले 15-20 हजार रुपये पाते थे। फंडिंग पाकिस्तान से आ रही थी। गिरोह सिग्नल ऐप और सोशल मीडिया के जरिए निर्देश लेता था।
गिरफ्तार आरोपी और उनके काम
- साकिब उर्फ डेविल (मेरठ): गिरोह का मुख्य ऑपरेटिव।
- अरबाब
- विकास गहलावत उर्फ रौनक (गौतमबुद्धनगर/बुलंदशहर क्षेत्र)
- लोकेश उर्फ पपला पंडित (गाजियाबाद/छपरौला)
इन चारों को 5 दिन का रिमांड मिला है। पूछताछ में मुंबई (कुर्ला-ठाणे) और कुशीनगर (रिजवान अहमद, पुराने ISIS मामले से जुड़ा) के लिंक भी सामने आए हैं। दिल्ली में टॉय कार से ब्लास्ट की साजिश भी रची जा रही थी।
बिजनौर पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर
नवंबर 2025 में बिजनौर के नांगल थाने में एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें आकिब खान (दुबई), साकिब उर्फ डेविल और बिजनौर के माजुल के बीच वीडियो कॉल पर AK-47 राइफल और हैंड ग्रेनेड दिखाए गए थे। बिजनौर पुलिस ने जांच के दौरान AK-47 को खिलौना और हैंड ग्रेनेड को परफ्यूम की बोतल बताकर पूरे मामले को क्लीन चिट दे दी थी। अब ATS के खुलासे के बाद बिजनौर पुलिस में हड़कंप मच गया। एसपी अभिषेक झा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए:
- तत्कालीन विवेचक SI सत्येंद्र मलिक को निलंबित कर दिया।
- CO नितेश प्रताप सिंह को हटा दिया।
आकिब खान का सफाई वीडियो
दुबई से आकिब खान ने खुद एक वीडियो जारी कर सफाई दी है। उन्होंने कहा,
“सच्चाई जाननी है तो मुझे कॉल करो। मेरा पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह नकली है।”उन्होंने अपना मोबाइल नंबर भी जारी किया। हालांकि ATS उन्हें गिरोह का सरगना मान रही है और उनके तीन इंस्टाग्राम अकाउंट्स (हजारों फॉलोअर्स) पर धार्मिक भाषण, हथियारों की तस्वीरें और धमकी भरे पोस्ट मिले हैं।
ATS ADG का बयान
यूपी के एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश ने कहा कि गिरोह कई शहरों (दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पंजाब) में सक्रिय था। फरवरी 2026 में कुछ सदस्य मुंबई गए थे, जहां आगजनी की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। पंजाब के गुरदासपुर में हथियार डिलीवरी का टास्क भी मिला था। ATS अब पूरे फंडिंग नेटवर्क, अन्य संपर्कों और संभावित बड़े हमलों की जांच कर रही है। चारों आरोपियों की रिमांड 9 अप्रैल तक है। यह मामला यूपी पुलिस की पूर्व जांच पर सवाल खड़ा कर रहा है, जबकि ATS की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को टाला है। स्थिति पर नजर बनी हुई है।

