नई दिल्ली/इस्लामाबाद/काबुल। दक्षिण एशिया में एक बड़ा युद्ध संकट खड़ा हो गया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर महीनों से चली आ रही तनातनी अब पूरी तरह खुले युद्ध में तब्दील हो गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुक्रवार को खुलेआम ऐलान किया कि “हमारे धैर्य का बांध टूट गया है — अब हमारे और तुम्हारे बीच खुली जंग है।” पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल सहित कई शहरों पर हवाई हमले किए, जबकि अफगानिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। दोनों परमाणु-संपन्न पड़ोसी देशों के बीच यह टकराव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।
क्यों लड़ रहे हैं दोनों देश — असली वजह क्या है?
दोनों देशों के बीच विवाद की जड़ में 2,611 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा है, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान को अलग करती है। अफगानिस्तान इस सीमा को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं देता और तर्क देता है कि यह औपनिवेशिक काल की थोपी गई सीमा है जिसने पश्तून जातीय क्षेत्रों को दो हिस्सों में बांट दिया।
इसके अलावा पाकिस्तान का मुख्य आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार अपनी जमीन पर पाकिस्तानी तालिबान (TTP) और अन्य आतंकी संगठनों को पनाह दे रही है, जो पाकिस्तान के भीतर हमले करते हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार 2025 में देशभर में आतंकी हमलों में 1,200 से अधिक लोग मारे गए — यह संख्या 2021 की तुलना में दोगुनी है।
कब से शुरू हुई थी यह खींचतान?
11 फरवरी 2026 को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी थी कि यदि तालिबान ने अपनी जमीन से आतंकी गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया तो रमजान शुरू होने से पहले पाकिस्तान कार्रवाई कर सकता है। फरवरी में पाकिस्तान में कई आतंकी हमले हुए, जिनमें इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में आत्मघाती हमले में 36 लोगों की मौत और बाजौर में एक चौकी पर हमले में 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत शामिल है।
21 फरवरी को पाकिस्तान ने की पहली हवाई बमबारी
21 फरवरी 2026 को पाकिस्तान वायु सेना ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पक्तिका और खोस्त प्रांतों में हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने कहा कि ये हमले TTP और ISIS-K के सात आतंकी शिविरों को निशाना बनाकर किए गए। हालांकि तालिबान अधिकारियों ने दावा किया कि हमलों में नागरिक इलाके और धार्मिक केंद्र निशाना बने और नंगरहार प्रांत में 18 नागरिकों की मौत हुई। संयुक्त राष्ट्र की UNAMA संस्था ने भी नागरिक हताहतों की पुष्टि की।
26-27 फरवरी: खुली जंग का ऐलान
26 फरवरी को अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी अभियान छेड़ा। इसके बाद पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ (Operation Ghazab Lil Haq — यानी ‘न्यायोचित रोष’) शुरू किया।
पाकिस्तान ने काबुल, कंधार, पक्तिया और जलालाबाद सहित अफगानिस्तान के कई शहरों में हवाई हमले किए। अफगानिस्तान के सरकारी प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि हमलों में निर्दोष नागरिकों, बच्चों और महिलाओं को निशाना बनाया गया, जिनमें जलालाबाद में एक किसान का पूरा परिवार तबाह हो गया और पक्तिका में बच्चों के एक मदरसे पर हमला हुआ।
पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी सेना ने 274 अफगान तालिबान लड़ाकों को मार गिराया और 400 को घायल किया। इसके साथ ही 73 तालिबान पोस्ट तबाह कर दीं और एक दर्जन से अधिक पर कब्जा कर लिया, वहीं अफगानिस्तान ने दावा किया कि उसने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और कई को जिंदा पकड़ लिया। पाकिस्तान ने माना कि उसके 12 सैनिक शहीद हुए और 27 घायल हुए।
TTP का भी आया बयान — अफगानिस्तान के साथ गठजोड़ की पुष्टि
पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद ने खुलकर पाकिस्तान के ‘अफगानिस्तान पर आक्रमण’ का बदला लेने का आह्वान किया, जिससे TTP और अफगान तालिबान के बीच गठजोड़ की पुष्टि हुई। पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया कि अफगानिस्तान भारत के साथ संबंध बढ़ाकर उसे घेरने की कोशिश कर रहा है।
अक्टूबर 2025 की जंग और टूटा संघर्षविराम
अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच भीषण सीमा संघर्ष हुआ था, जिसके बाद कतर और तुर्की की मध्यस्थता में संघर्षविराम हुआ। नवंबर में इस्तांबुल में तीन दौर की शांति वार्ता हुई, लेकिन सभी विफल रहीं। पाकिस्तान चाहता था कि तालिबान TTP के खिलाफ लिखित गारंटी दे, जबकि तालिबान ने कहा कि पाकिस्तान ने “अनुचित मांगें” रखीं और उसकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हलचल — कतर की मध्यस्थता
कतर एक बार फिर मध्यस्थता के लिए आगे आया है। कतर के विदेश राज्य मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज अल-खुलैफी ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों के विदेश मंत्रियों से तनाव कम करने के लिए बात की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि उन्होंने सुना है कि दोनों देशों के बीच युद्ध चल रहा है और उन्होंने इसे जल्द सुलझाने की बात कही।
सैन्य असंतुलन — पाकिस्तान कहीं ज्यादा ताकतवर
दोनों देशों की सैन्य क्षमता में भारी अंतर है। पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है जिसकी सेना, नौसेना, वायु सेना और मरीन कोर में लगभग 6.60 लाख सक्रिय सैनिक हैं, और अर्धसैनिक बलों को मिलाकर यह संख्या करीब 9.60 लाख तक पहुंचती है। अफगानिस्तान की तालिबान सेना इसके सामने बेहद कमजोर है और इसीलिए वह पारंपरिक युद्ध की बजाय छापामार और ड्रोन हमलों का सहारा ले रही है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक TTP की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक दोनों देशों के बीच तनाव बना रहेगा। दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच यह संघर्ष पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब कतर की मध्यस्थता पर टिकी हैं और उम्मीद है कि जल्द ही किसी तरह का संघर्षविराम हो सके।

