युवराज मेहता मौत मामला: SIT रिपोर्ट सौंपी एक महीने बाद भी कार्रवाई का इंतजार, पिता ने छोड़ दिया देश

युवराज मेहता मौत मामला: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में जनवरी 2026 की रात पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार गिरने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट शासन को सौंपे हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। युवराज के पिता ने निराशा में देश छोड़कर यूके शिफ्ट कर लिया है लेकिन अभी भी वे SIT की फाइंडिंग्स का इंतजार कर रहे हैं। यह मामला नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही, निर्माण साइट की सुरक्षा विफलता और रेस्क्यू में देरी का प्रतीक बन चुका है।

हादसे का पूरा घटनाक्रम
युवराज मेहता अपनी SUV (ग्रैंड विटारा) में अपने घर की तरफ़ लौट रहे थे जब घने कोहरे और खराब विजिबिलिटी के कारण निर्माणाधीन स्पोर्ट्स सिटी मॉल (MZ Wishtown Planners और Lotus Greens Construction) के बेसमेंट के लिए खोदे गए 21 मीटर गहरे (70 फीट) पानी भरे गड्ढे में कार गिर गई। गड्ढा बिना बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या लाइटिंग के खुला छोड़ा गया था। युवराज ने 90 मिनट तक छत पर चढ़कर फोन की टॉर्च जलाकर मदद मांगी, पिता को कॉल किया, लेकिन रेस्क्यू टीम के पास पर्याप्त संसाधन (ट्रेंड डाइवर्स, क्रेन आदि) नहीं थे। अंत में डूबने से मौत हुई—पोस्टमॉर्टम में asphyxia (घुटन) और कार्डियक अरेस्ट पाया गया था।

SIT जांच के प्रमुख खुलासे
SIT (एडीजीपी भानु भास्कर की अध्यक्षता में) ने जनवरी अंत में रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बिल्डर की बड़ी लापरवाही सामने आई—8 मीटर की अनुमति पर 21 मीटर गड्ढा खोदा गया। पहले भी 2022 में बिल्डर ने ही सेनेज और स्टॉर्मवॉटर फ्लडिंग की चेतावनी दी थी, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। रेस्क्यू में 90 मिनट की देरी—NDRF/फायर ब्रिगेड के पास पर्याप्त उपकरण नहीं, कोऑर्डिनेशन फेल। नोएडा अथॉरिटी के प्लानिंग, सिविल और ट्रैफिक विभाग पर सवाल—कई अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई। रिपोर्ट में दर्जनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, निलंबन की सिफारिश भी थी।

अब तक की कार्रवाई और देरी
हादसे के तुरंत बाद पुलिस ने बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज की (BNS सेक्शन 105- culpable homicide, 106- negligence causing death, 125- endanger life)। एक मालिक अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में बिल्डर निर्मल सिंह को फरवरी में अग्रिम जमानत मिल गई। नोएडा अथॉरिटी ने हादसे के बाद सेक्टर-150 में 65 रोड-सेफ्टी स्पॉट्स पर बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, लाइटिंग लगाई और गड्ढे को फिल करना शुरू किया—अब वहां सुरक्षा दीवारें खड़ी हो रही हैं। लेकिन SIT रिपोर्ट पर कोई बड़ा एक्शन नहीं—न तो अधिकारियों का निलंबन, न बिल्डरों पर सख्त कदम। रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। युवराज के पिता ने फरवरी में कहा, “मैं SIT फाइंडिंग्स का इंतजार कर रहा हूं,” लेकिन अब वे यूके चले गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे “सिस्टम की असफलता” बता रहे हैं।

निवासियों का गुस्सा
सेक्टर-150 के लोग इसे “खूनी नाला” कहते हैं—रहने वाले राम के भरोसे जी रहे हैं। पहले भी छोटे हादसे हुए, लेकिन चेतावनी अनसुनी रही। युवराज की मौत के बाद अथॉरिटी ने सफाई दिखाई, लेकिन स्थायी सुधार की मांग तेज हो रही है। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं है, नोएडा जैसे शहर में निर्माण, सुरक्षा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स की गहरी खामी उजागर कर रहा है। क्या SIT रिपोर्ट पर कार्रवाई होगी या फिर यह भी फाइलों में दब जाएगा? परिवार और नागरिक अब जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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