हादसे की पृष्ठभूमि युवराज मेहता (27 वर्ष) अपनी कार से घर लौट रहे थे, जब घने कोहरे और खराब रोशनी में निर्माणाधीन साइट पर बने 30-70 फीट गहरे जलमग्न गड्ढे (बेसमेंट) में कार गिर गई। वे करीब 90-120 मिनट तक मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन बचाव दल समय पर नहीं पहुंच सका। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण asphyxiation और cardiac failure बताया गया। परिवार ने बिना बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और फेंसिंग के लापरवाही का आरोप लगाया।
कार्रवाई और SIT का अपडेट विधायक तेजपाल नागर ने कहा कि घटना के बाद उन्होंने खुद घटनास्थल का निरीक्षण किया, CM योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा और मामले को संज्ञान में रखा। नोएडा अथॉरिटी के CEO को सस्पेंड किया गया, शो-कॉज नोटिस जारी हुए, और SIT (विशेष जांच दल) गठित की गई थी, जिसने जनवरी के अंत में 600+ पन्नों की रिपोर्ट शासन को सौंप दी। रिपोर्ट में बचाव दल की लापरवाही, बिल्डर की नियम तोड़ने और अधिकारियों की चूक का जिक्र है। बिल्डर निर्मल सिंह और अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बिल्डर को फरवरी में अग्रिम जमानत मिल गई।
हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार, SIT रिपोर्ट सौंपे एक महीने से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन अब तक दोषियों पर कोई ठोस अतिरिक्त कार्रवाई नहीं हुई है। विधायक ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर जरूरी कार्रवाई होगी, और सरकार इस मामले में संवेदनशील है। सेक्टर-150 में अब सुरक्षा उपाय बढ़ाए गए हैं, जैसे खुले प्लॉट में पानी जमा न होने देने के निर्देश और बैरिकेडिंग।
परिवार और जनता की प्रतिक्रिया युवराज के पिता को CM से मिलने का कार्यक्रम था, लेकिन विदेश यात्रा के कारण नहीं हो सका। वे फिलहाल कार्रवाई से संतुष्ट बताए जा रहे हैं, लेकिन जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग अभी भी लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं, खासकर जब ग्रेटर नोएडा में इसी तरह के हादसे (जैसे प्रीत विहार में बच्चे की मौत) हो रहे हैं।
यह मामला नोएडा में निर्माण साइटों पर सुरक्षा मानकों की कमी और प्रशासन की जवाबदेही को उजागर करता है। SIT रिपोर्ट के बाद आगे क्या कदम उठते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

