नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 में हुए हादसे में एक इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। यह मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सुरक्षा मानकों, निर्माण कार्य की निगरानी और आपात प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। घटना के बाद जिला प्रशासन ने हालात का जायज़ा लिया और राहत-बचाव से लेकर जांच तक की प्रक्रिया शुरू की गई। ये मामला बता रहा है कि किस तरह से है जिला प्रशासन की लापरवाही बरतता है और लोगों की जान दाँव पर लग जाती है।
जिलाधिकारी मेधा रूपम की भूमिका क्या है
बता दें कि गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम जिले में आपदा प्रबंधन की सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होती हैं। वह जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की अध्यक्ष होती हैं और किसी भी आपदा या बड़े हादसे की स्थिति में समन्वय, राहत और बचाव की जिम्मेदारी उन्हीं के अधीन आती है। ऐसे मामलों में NDRF, SDRF, पुलिस, फायर सर्विस और स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल स्थापित करना जिला प्रशासन का दायित्व होता है।
NDRF से संबंध और समन्वय की जिम्मेदारी
NDRF (नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स) केंद्र सरकार की एजेंसी है, लेकिन ज़िला स्तर पर उसकी तैनाती और सहायता के लिए जिलाधिकारी ही मांग और समन्वय की प्रक्रिया शुरू करती हैं। किसी भी बड़े हादसे में यदि विशेष तकनीकी बचाव या अतिरिक्त संसाधनों की ज़रूरत पड़ती है, तो जिला प्रशासन NDRF को बुलाने का निर्णय लेता है। इस लिहाज़ से मेधा रूपम की भूमिका सीधे तौर पर राहत-बचाव कार्यों के संचालन और निगरानी से जुड़ी होती है, न कि किसी एकल घटना के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी तय करने से।
हादसे में जिम्मेदारी किस पर बनती है
सेक्टर-150 हादसे को लेकर अब जांच का केंद्र यह है कि—
- क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं
- साइट पर काम कर रही निर्माण एजेंसी/ठेकेदार ने श्रम कानून और सेफ्टी गाइडलाइंस का पालन किया या नहीं
- संबंधित प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग स्टाफ की निगरानी में कोई लापरवाही तो नहीं हुई
- और क्या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया था
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिम्मेदारी तय करने के लिए पुलिस और प्राधिकरण स्तर पर तथ्यों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, साइट निरीक्षण और दस्तावेज़ों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित कदम
ऐसे मामलों में यदि लापरवाही साबित होती है तो—
- संबंधित ठेकेदार या कंपनी के खिलाफ एफआईआर
- निर्माण कार्य पर रोक या सीलिंग
- और श्रम विभाग व प्राधिकरण द्वारा दंडात्मक कार्रवाई
जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। जिला प्रशासन की भूमिका यहां जांच को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाने और पीड़ित परिवार को राहत दिलाने की होती है।

