नोएडा | नोएडा विकास प्राधिकरण और सफाई कर्मचारी नेताओं के बीच चल रहा गतिरोध अब पुलिसिया कार्रवाई की दहलीज पर पहुँच गया है। प्राधिकरण के कार्यों में व्यवधान डालने और सफाई कर्मचारियों को उकसाने के गंभीर आरोपों में पुलिस ने आधा दर्जन कर्मचारी नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद से विभाग और कर्मचारी संगठनों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।
इन नेताओं के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
थाना फेस-वन पुलिस ने प्राधिकरण के अधिकारियों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए निम्नलिखित लोगों को नामजद किया है:
- सतबीर मकवाना (नेता)
- साधु मकवाना
- सुनील टोंक
- बबलू पार्चा
- रवि पार्चा
- राधे पार्चा
क्या है पूरा मामला?
नोएडा प्राधिकरण के अवर अभियंता (Junior Engineer) हरेंद्र सिंह मलिक ने गुरुवार रात थाना फेस-वन में तहरीर दी। शिकायत के मुताबिक, ये आधा दर्जन नेता प्राधिकरण के अंतर्गत कार्यरत सफाई कर्मियों को आए दिन भड़काते हैं और उन्हें अनर्गल धरना-प्रदर्शन के लिए उकसाते हैं।
अधिकारी द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप:
- सरकारी कार्य में बाधा: बार-बार हड़ताल और प्रदर्शन के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
- अधिकारियों से अभद्रता: आरोप है कि ये नेता न केवल काम रोकते हैं, बल्कि प्राधिकरण दफ्तर आकर अधिकारियों के साथ बदतमीजी और दुर्व्यवहार भी करते हैं।
- जनता की परेशानी: प्रदर्शन के कारण शहर के विभिन्न सेक्टरों में कूड़े के ढेर लग गए हैं, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है और आम नागरिक परेशान हैं।
पुलिस की कार्रवाई
थाना फेस-वन के प्रभारी निरीक्षक अमित कुमार मान ने बताया कि अवर अभियंता की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब इस मामले के साक्ष्य जुटा रही है और जल्द ही आरोपियों से पूछताछ की जा सकती है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन प्रदर्शनों के पीछे की मुख्य वजह क्या है और क्या इसके लिए कोई बाहरी दबाव काम कर रहा है।पुलिस अफ़सरों का कहना है कि “नोएडा जैसे शहर में सफाई व्यवस्था को बाधित करना सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
शहर की स्थिति पर असर
पिछले कुछ दिनों से चल रहे इस खींचतान का सीधा असर नोएडा की सड़कों पर दिख रहा है। कई रिहायशी इलाकों और मुख्य बाजारों में सफाई कार्य प्रभावित होने से गंदगी पसरी हुई है। प्राधिकरण अब वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए शहर की स्वच्छता बहाल करने की कोशिश कर रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा: क्या आप जानते हैं भारत को सबसे ज़्यादा LPG कौन सा देश देता है?

