इस घटना के बाद प्रशासनिक गलियारों में पुरानी चर्चा फिर जोर पकड़ रही है कि नोएडा अथॉरिटी में सीईओ और चेयरमैन का पद फिर से एक कर दिया जाए। विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि जब दोनों पद एक ही सीनियर आईएएस अधिकारी के पास होते हैं, तो निर्णय प्रक्रिया तेज होती है और विकास कार्यों में गति आती है। पिछले 15 साल के रिकॉर्ड में चिल्ला-भंगेल एलिवेटेड रोड, मेट्रो विस्तार और बड़े बिल्डर-बायर विवादों के निस्तारण जैसे काम इसी मॉडल में हुए थे।
लोकेश एम के कार्यकाल में विजन तो चर्चा में रहा, लेकिन प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन मिस होना, बोर्ड मीटिंग में कम एजेंडे पास होना और बजट उपयोग में कमी जैसे मुद्दे उजागर हुए। फिलहाल नए सीईओ की नियुक्ति पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के नामों पर विचार चल रहा है।
घटना में लापरवाही के लिए जूनियर इंजीनियर को भी निलंबित किया गया है और संबंधित बिल्डरों पर कार्रवाई चल रही है। नोएडा में सुरक्षा मानकों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे शासन का कड़ा रुख देखने को मिला। आने वाले दिनों में नई नियुक्ति और संभावित संरचनात्मक बदलाव पर सबकी नजरें टिकी हैं।

